ब्राह्मण बेटियों पर टिप्पणी मामले में IAS संतोष वर्मा को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Monday, Jun 29, 2026-05:06 PM (IST)
भोपाल: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं अजाक्स के कथित प्रदेश अध्यक्ष संतोष वर्मा के विरुद्ध दायर जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिका में मांगी गई राहतें कानूनी रूप से स्वीकार नहीं की जा सकतीं तथा यदि किसी मामले में कारर्वाई बनती है तो कानून अपना कार्य करेगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता अभिषेक दुबे ने आरोप लगाया था कि नवंबर 2025 में अजाक्स के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद संतोष वर्मा ने ब्राह्मण समाज के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। याचिका में उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कारर्वाई, विभागीय अनुशासनात्मक कारर्वाई तथा ब्राह्मण समाज के हित में दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई थी। न्यायालय ने कहा कि जिन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी, उस संबंध में पहले से ही मामला दर्ज है, इसलिए इस संबंध में अलग से कोई आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है।
खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कारर्वाई करना संबंधित प्रशासनिक प्राधिकार का अधिकार क्षेत्र है और न्यायालय सरकार को किसी विशेष व्यक्ति पर यह कानून लागू करने का निर्देश नहीं दे सकता। विभागीय कारर्वाई की मांग पर न्यायालय ने कहा कि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कारर्वाई से संबंधित मामलों में भारत सरकार आवश्यक पक्षकार होती है, जबकि याचिका में उसे पक्षकार नहीं बनाया गया है। इस कारण इस संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने ब्राह्मण समाज के लिए विशेष नीति अथवा दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी यह कहते हुए अस्वीकार कर दी कि यह कार्यपालिका और विधायिका के अधिकार क्षेत्र का विषय है।

