नगर निगम को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, दैनिक वेतनभोगी होंगे रेगुलर, स्थाई दर्जे के साथ वेतन लाभ देना जरूरी
Sunday, Jan 25, 2026-10:22 PM (IST)
(इंदौर): इंदौर नगर निगम को एक बड़ा झटका लगा है। दरअसल कर्मचारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ये बड़ा फैसला दिया है। 1825 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी का दर्जा देने के मामले में इंदौर नगर निगम को सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक बड़ा फरमान आया है। सुप्रीम कोर्ट ने MP हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है । साथ ही निगम द्वारा दायर सभी विशेष अनुमति याचिकाएं खारिज कर दीं। इस फैसले के साथ ही इंदौर नगर निगम के लिए इन 1825 कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा और वेतन के लाभ देना भी अनिवार्य हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट में नगर निगम की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने पक्ष रखा था लेकिन कोर्ट ने दलीलों को स्वीकार नहीं किया।कोर्ट ने साफ कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता, साथ ही ये भी कहा कि विशेष अनुमति याचिकाएं निरस्त की जाती हैं ।
वहीं इससे पहले निगम कर्मचारी यूनियन की ओर से औद्योगिक न्यायाधिकरण में कर्मचारियों को 'समान काम समान प्रकरण दायर किया था। 6 फरवरी 2023 को न्यायाधिकरण ने वेतन' का लाभ देने का आदेश दिया था। लेकिन नगर निगम ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने और स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन लाभ देने को सही ठहराया था।
कोर्ट ने यह भी माना कि नगर निगम की कार्यशाला फैक्ट्री अधिनियम के तहत पंजीकृत है, इसलिए वहां कार्यरत कर्मचारी औद्योगिक कानूनों के तहत स्थायी दर्जे के हकदार हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से इनकार के बाद इंदौर नगर निगम को इन 1825 कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा और वेतन लाभ देना अनिवार्य हो गया है। लिहाजा ये कर्मचारियों के लिए राहत का बात मानी जा रही है।

