सहन नहीं होगा वंदे मातरम का अपमान, हाईकोर्ट ने कांग्रेस की दोनों पार्षदों को नोटिस किया जारी, कोर्ट अपनाएगा सख्त रुख
Thursday, Apr 16, 2026-09:36 PM (IST)
(इंदौर सचिन बहरानी): मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खण्डपीठ इंदौर के समक्ष एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन के दौरान सरकारी और सार्वजनिक मंचों पर गरिमापूर्ण आचरण सुनिश्चित करने के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचे की माँग की गई है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने इस याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया है और मामले से जुड़े पार्षदों रूबीना इकबाल खान व फौजिया शेख अलीम को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

यह कानूनी कार्यवाही इंदौर नगर निगम की एक हालिया घटना के बाद शुरू हुई है, जहाँ राष्ट्रीय गीत के दौरान हुए विवाद ने प्रदेश भर का ध्यान खींचा था। याचिकाकर्ता और अधिवक्ता योगेश हेमनानी ने स्वयं न्यायालय के समक्ष पक्ष रखते हुए दलील दी कि वर्तमान में शासकीय संस्थानों में वंदे मातरम् के उच्चारण के समय व्यवहार और अनुशासन को लेकर किसी प्रभावी नियामक ढांचे का अभाव है। उन्होंने माननीय न्यायालय से प्रार्थना की कि सार्वजनिक संस्थानों में राष्ट्रीय गीत की गरिमा को बनाए रखने के लिए स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप उचित दिशा-निर्देश तैयार किए जाने चाहिए।
याचिका में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 51A (a) के तहत प्रत्येक नागरिक का यह मौलिक कर्तव्य है कि वह राष्ट्र के आदर्शों और उसके प्रतीकों का पूर्ण सम्मान करे, अतः सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों का आचरण मर्यादित होना अनिवार्य है। यह मामला वर्तमान में माननीय न्यायालय के विचाराधीन है और इसकी गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने संबंधित पक्षों प्रमुख सचिव, गृह सचिव व अन्य सरकारी विभागों को सूचना पत्र जारी कर जवाब मांगा है। इस याचिका के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि भविष्य में किसी भी सार्वजनिक या सरकारी कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत के गायन के समय किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता न हो और इसकी पवित्रता व सम्मान अक्षुण्ण बना रहे। लिहाजा मामले से जुड़े पार्षदों रूबीना इकबाल खान व फौजिया शेख अलीम को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

