Punjab Kesari MP ads

SC/ST एक्ट को लेकर बुरे फंसे IPS अधिकारी! हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, 3 अधिकारियों पर दर्ज FIR की रद्द

Saturday, Apr 04, 2026-04:24 PM (IST)

रीवा : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कानून के दुरुपयोग और प्रशासनिक प्रभाव के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए पश्चिम-मध्य रेलवे के तीन सतर्कता अधिकारियों के खिलाफ दर्ज 12 साल पुराने आपराधिक मामले को निरस्त कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि मामला प्रथम दृष्टया बाहरी प्रभाव और अधिकार क्षेत्र के उल्लंघन का प्रतीत होता है।

क्या था मामला

घटना 29 दिसंबर 2011 की है, जब जबलपुर-रीवा इंटरसिटी एक्सप्रेस में विजिलेंस जांच के दौरान टिकट कलेक्टर प्यार सिंह मीणा ने आरोप लगाया था कि विजिलेंस टीम ने उनके साथ जातिगत भेदभाव करते हुए अभद्र व्यवहार किया। इस शिकायत पर जीआरपी जबलपुर ने जांच की, जिसमें विजिलेंस अधिकारियों और आरपीएफ जवानों को क्लीन चिट दे दी गई थी।

आईजी की दखल के बाद बदला घटनाक्रम

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब शिकायतकर्ता ने तत्कालीन आईजी गजी राम मीणा से संपर्क किया। आरोप है कि आईजी ने नियमों की अनदेखी करते हुए जीआरपी कटनी को मामले की दोबारा जांच के निर्देश दिए, जबकि यह क्षेत्र उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था। इसके बावजूद दबाव में नई एफआईआर दर्ज कर ली गई। इसके बाद अधिकारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बिना वैधानिक अनुमति (धारा 197 CrPC) के कार्रवाई के निर्देश देना और अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर केस दर्ज कराना गंभीर संदेह पैदा करता है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आईजी और शिकायतकर्ता का एक ही जाति से होना तथा कार्रवाई में दिखाई गई असामान्य जल्दबाजी इस ओर इशारा करती है कि बाहरी प्रभाव में निर्णय लिए गए।अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की कार्रवाई कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है, इसलिए पूरे प्रकरण को निरस्त किया जाना न्यायोचित है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

meena

Related News