कमलनाथ की धरी रह गई NOC, दिल्ली जाने की थी पूरी तैयारी; आखिरी वक्त में बदल गया पूरा खेल, जानिए इनसाइड स्टोरी
Monday, Jun 15, 2026-04:01 PM (IST)
भोपाल। मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव का घटनाक्रम अब केवल एक नामांकन रद्द होने तक सीमित नहीं रह गया है। इसके पीछे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति, नेतृत्व की पसंद-नापसंद और सत्ता के गलियारों में चल रही रणनीतियों की कई परतें सामने आ रही हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जिस सीट पर आखिरकार मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया गया, उस पर आखिरी समय तक पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के नाम पर गंभीर मंथन चल रहा था।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और प्रदेश के कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच कमलनाथ को राज्यसभा भेजने को लेकर सहमति बनाने की कोशिशें तेज थीं। माना जा रहा था कि विधानसभा चुनाव 2023 के बाद प्रदेश की राजनीति में अपेक्षाकृत शांत दिख रहे कमलनाथ राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए दिल्ली लौट सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए उन्होंने नामांकन प्रक्रिया से जुड़े जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं भी समय रहते पूरी कर ली थीं।
बताया जाता है कि कमलनाथ ने भोपाल स्थित सरकारी आवास से संबंधित बकाया जलकर और अन्य नगर निगम करों का भुगतान कर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) तक प्राप्त कर लिया था। राजनीतिक गलियारों में इसे उनके राज्यसभा चुनाव लड़ने की तैयारी का स्पष्ट संकेत माना जा रहा था। कांग्रेस के कई नेताओं का भी मानना था कि भाजपा की ओर से तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारे जाने की संभावना को देखते हुए अनुभवी और राष्ट्रीय स्तर की पहचान रखने वाले चेहरे के रूप में कमलनाथ पार्टी के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते थे।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ऐन वक्त पर तस्वीर बदल गई। कांग्रेस हाईकमान ने मीनाक्षी नटराजन के नाम पर मुहर लगा दी। इसके बाद जो हुआ, उसने पार्टी को राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर असहज स्थिति में ला खड़ा किया। नामांकन पत्र तकनीकी कारणों से निरस्त हो गया और कांग्रेस के हाथ से वह सीट भी निकल गई, जिस पर उसका दावा लगभग तय माना जा रहा था।
पार्टी के भीतर अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी को प्रदेश संगठन और कई विधायकों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया। कुछ नेताओं का मानना है कि उम्मीदवार चयन को लेकर बनी असहमति का असर नामांकन प्रक्रिया में दिखाई दिया, जहां आवश्यक सतर्कता और समन्वय नजर नहीं आया। हालांकि इस संबंध में कोई नेता खुलकर बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन बंद कमरों में सवाल लगातार उठ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह मामला केवल एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर मौजूद समन्वय की कमी और गुटीय राजनीति का परिणाम भी माना जा रहा है। राज्यसभा की एक सीट गंवाने के साथ ही पार्टी को संगठनात्मक विश्वसनीयता पर भी सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा नुकसान संभवतः कमलनाथ को हुआ है। दिल्ली की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले वरिष्ठ नेता के लिए राज्यसभा का रास्ता लगभग तैयार माना जा रहा था, लेकिन अंतिम क्षणों में बदले फैसले और उसके बाद हुए घटनाक्रम ने उनकी संभावित दिल्ली वापसी पर फिलहाल विराम लगा दिया है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अब इस पूरे प्रकरण से हुए राजनीतिक नुकसान की भरपाई कैसे करती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। लेकिन इतना तय है कि राज्यसभा चुनाव की यह कहानी आने वाले दिनों में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और नेतृत्व की कार्यशैली पर नए सवाल खड़े करती रहेगी।

