MP में होने वाला है मंत्रिमंडल विस्तार? 20 मंत्रियों की ‘पेशी’ से बढ़ी हलचल,पूछे गए सवाल
Monday, May 18, 2026-12:59 PM (IST)
भोपाल। मध्य प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार के मंत्रियों के कामकाज की व्यापक समीक्षा शुरू हो गई है, जिसके तहत रविवार को 20 मंत्रियों को सत्ता और संगठन के समक्ष वन-टू-वन प्रस्तुत होना पड़ा। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों ने अपने विभागीय कार्यों और प्रभार वाले जिलों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया।
इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मौजूद रहे। मंत्रियों से करीब 60 बिंदुओं पर सवाल-जवाब किए गए, जिनमें उनके प्रभार वाले जिलों में दौरे, रात्रि विश्राम, जनसंवाद और संगठनात्मक सक्रियता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक मंत्री के लिए लगभग 15 मिनट का समय निर्धारित था, लेकिन उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की प्रस्तुति अपेक्षाकृत लंबी चली। वहीं मंत्री विजय शाह को भी करीब 20 मिनट तक अपने कार्यों का ब्योरा देना पड़ा। इसके बाद इंदर सिंह परमार, प्रहलाद पटेल, उदय प्रताप सिंह, गौतम टेटवाल, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, कैलाश विजयवर्गीय, निर्मला भूरिया, लखन पटेल, दिलीप जायसवाल और नारायण सिंह पंवार सहित अन्य मंत्रियों ने अपनी उपलब्धियां और योजनाओं की जानकारी साझा की।
बैठक के दौरान कई मंत्रियों ने न केवल अपने कामकाज का ब्यौरा रखा, बल्कि कुछ ने संगठन के सामने अपनी शिकायतें और जमीनी चुनौतियां भी खुलकर रखीं। वहीं कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन की सराहना भी की गई। समीक्षा के दौरान संगठन ने खासतौर पर उन विधानसभा क्षेत्रों और बूथों पर फोकस किया, जहां पार्टी को पिछले चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। मंत्रियों से पूछा गया कि उन क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों में जीत सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने क्या ठोस रणनीति बनाई है।
इसके अलावा जनप्रतिनिधियों से समन्वय, जनता से निरंतर संपर्क, विभागीय नवाचार, बड़ी घटनाओं की रोकथाम और विपक्ष के आरोपों के जवाब जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। विशेष रूप से गेहूं खरीदी जैसे विषयों पर विपक्ष के दावों को प्रभावी तरीके से खारिज करने की रणनीति पर भी मंत्रियों से जवाब तलब किया गया।
राजनीतिक हलकों में इस पूरी कवायद को मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी संगठन आधिकारिक तौर पर इसे नियमित समीक्षा प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन अंदरखाने इसे आगामी राजनीतिक फेरबदल की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
प्रदेश में आगामी चुनावों और संगठनात्मक मजबूती को देखते हुए इस समीक्षा को बेहद अहम माना जा रहा है, और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इसके परिणाम सरकार और मंत्रिमंडल दोनों पर असर डाल सकते हैं।

