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आम्बुआ में वीर शिरोमणि राणा पूंजा भील की मूर्ति स्थापित, शंकर बामनिया बोले- कांग्रेस-भाजपा दोनों ने आदिवासी समाज का शोषण किया

Friday, Jun 02, 2023-05:29 PM (IST)

अलीराजपुर (सोहेल कुरेशी): अलीराजपुर जिले के आम्बूआ में आदिवासी समाज के महानायक वीर शिरोमणि राणा पूंजा भील की मूर्ति स्थापना की गई। इस स्थापना कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज के हजारों युवा महिला आदिवासी समाज के लोगों का हुजूम उमड़ा। सुबह से ही आम्बूआ की धरती पर आदिवासी समाज के लोग इकत्रित होने लगे थे। कार्यक्रम में गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के सभी जिले से समाज के लोग शामिल हुए। समाज को मार्गदर्शन देने के लिए आदिवासी समाज के गुरू भवर लाल परमार, भील सेना के प्रदेश संयोजक मांगीलाल निनामा, नितेश अलावा, लालसिंह डावर, भदूभाई पचाया सहित कई गणमान्य लोग ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल हुए। जहां उन्होंने अपने संबोधन में समाज को एकजुट होकर काम करने की सलाह दी।

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परमार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस और भाजपा ने आजादी के 75 साल तक इस देश पर राज किया। मगर हमारे आदिवासी समाज के वीर महापुरूषों के इतिहास को दबा कर रखा इसे बाहर नहीं आने दिया। लेकिन जब आदिवासी समाज के युवाओं ने समाज को संगठित कर पूरे देश में एक क्रांति जगाई, उससे सरकारे हिल गई और आज आदिवासी समाज के महापुरूषों के इतिहास को हम जान पाए हैं। जगह-जगह समाज के लोग महापुरूषों के स्मारक गाता स्थापित कर रहे है। ये बदलाव हमारे समाज के एकजुट का परिणाम है आगे हम सभी एक जुट रहे तो कोई भी सरकारी ताकत हमारी जल, जंगल और जमीन से बेदखल नहीं कर सकती है। हम सभी को एकजुट होकर रहना है। आदिवासी समाज इस देश का मालिक है और हम इस देश के मूल मालिक है। इसलिए किसी के बहकावे में आकर समाज को तोड़ने का काम नहीं करना चाहिए।

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मध्यप्रदेश में इतिहास रचते है आदिवासी समाज के युवा

कार्यक्रम को भील सेना संस्थापक शंकर बामनिया ने संबोधित करते हुए कहा के आज पूरे प्रदेश मे आदिवासी समाज के युवा इतिहास रच जगह जगह हमारे महापुरूषों के गाते स्थापित कर रहे हैं। जयस संगठन के युवाओं के द्वारा अलीराजपुर जिला मुख्यालय पर टंट्या भील का गाता स्थापित किया गया। उसके बाद कट्ठीवाड़ा में बिरसा मूंडा का गाता स्थापित किया गया, आजाद नगर में युवाओं के द्वारा त्रिमूर्ति का गाता स्थापित किया गया। इसी कड़ी में आज आम्बूआ की धरती पर वीर शिरोमणि राणा पूंजा भील की मूर्ति गाता स्थापित किया गया। ये हमारे समाज की ताकत है। जो हम सब एकजुट होकर हजारों की संख्या में आम्बूआ की धरती पर इक्ठठा हुए हैं। जहां भी हमारे महापुरूषों के गाते स्थापित किए गए वहां हमने इतिहास रचने का काम किया है।

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उन्होंने आगे कहा कि आपको बताना चाहता हुं कि सरकारें आदिवासी समाज को बेवकूफ समझती है। इसलिए अभी वर्तमान में दोनों राजनैतिक दल आदिवासी समाज की बहन बेटियों को लालच दे रहे हैं। कोई एक हजार रुपए दे रहा है कोई 1500 रुपए देने की बात कर रहा है। अब हमारे समाज की बहन बेटियों की कीमत 1000 -1500 रुपए रह गई। लॉलीपोप सरकारें दे रही है। लेकिन हमें इनके झांसें में आना नहीं है। हम मेहनत कश लोग है। ये धरती हमारी है, ये जंगल हमारे है, और जल हमारा है। हम प्रकृति पूजक लोग है। हमें किसी की भीख की जरूरत नहीं है। आज हमारी बहन बेटियों को कड़ी धूप में बाजार में बैठकर सब्जी बेचना पड़ रही है। लेकिन वहां बाजार में बेठने के भी सरकार पैसे ले रही है। सुविधा कुछ भी नहीं लेकिन बाजार में बैठने के पैसे लिए जा रहे है। मतलब हमारे पैसे लेकर हमीं को दे रहे हैं। ऐसा अब नहीं चलेगा सरकार किसी की भी हो चाहे भाजपा की हो या कांग्रेस की आदिवासी समाज की बहन बेटियों को बाजार में सब्जी बेचने आने पर बाजार बैठक शुल्क को खत्म करना पड़ेगा। ये आदिवासी बाहुल्य जिला है यहां हमारी जमीन पर हमीं से टेक्स के रूप में बैठने के लिए पैसे लिए जा रहे हैं जो गलत है। हम इसका विरोध करते है।

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कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सर्व आदिवासी समाज के लोगों का भील सेना संगठन प्रदेश अध्यक्ष रमेश बघेल जिलाध्यक्ष चतरसिंह मंडलोई ने सभी का आभार माना। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आम्बूआ जैसे छोटे से गांव में महामानव वीर शिरोमणी राणा पूंजा भील की मूर्ति स्थापित कार्यक्रम में इतनी अधिक संख्या में लोग हुए है, हम सभी का आभार मानते हैं। सभी को एकजुट होकर समाज के कार्यक्रम में शामिल होते रहना चाहिए।


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Content Writer

meena

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