अस्थाई कनेक्शन की अवधि खत्म ! अब काटे जाएंगे 300 कनेक्शन, लोगों में हड़कंप

Thursday, Feb 12, 2026-02:56 PM (IST)

भोपाल : राजधानी के भदभदा क्षेत्र में अस्थाई कनेक्शन समाप्त करने के निर्देंशों से हड़कंप मचा हुआ है। दरअसल, भदभदा क्षेत्र स्थित भावना परिसर के रहवासियों को एक नोटिस मिला है। जिसमें भारी भरकम राशि जमा कराने की बात कही है साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो आपके कनेक्शन काट दिए जाएंगे।

दरअसल, बिजली कंपनी ने एक नोटिस जारी किया है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि पांच साल से अधिक समय तक अस्थायी कनेक्शन बनाए रखना नियमों का उल्लंघन है। यदि रहवासी स्थाई कनेक्शन में परिवर्तन नहीं कराते हैं तो बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाएगी और मीटर भी हटा लिया जाएगा।

नगर निगम के वार्ड 26 की इस कॉलोनी में बिल्डर द्वारा शुरू से ही पर्याप्त बिजली अधोसंरचना विकसित नहीं की गई। रहवासियों को अस्थायी कनेक्शन के जरिए महंगी दरों पर बिजली उपलब्ध कराई गई, जो अब पांच साल पूरे कर चुका है। बड़ी बात यह कि बिजली कंपनी ने नियमों का हवाला देते हुए कनेक्शन काटने की प्रक्रिया शुरू भी कर दी है। लोगों की समस्या यह है कि स्थायी कनेक्शन के लिए मांगी जा रही राशि 50 हजार से 80 हजार रुपए के बीच है। जो कम समय में दे पाना बेहद मुश्किल है।

क्या है स्थायी कनेक्शन की प्रक्रिया और शुल्क?

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंधक नितिन उपाध्याय के अनुसार, स्थायी कनेक्शन के लिए ‘सरल संयोजन’ पोर्टल या ‘उपाय’ ऐप के माध्यम से आवेदन करना होता है। बिजली अधोसंरचना शुल्क के रूप में 15,600 रुपए प्रति किलोवॉट निर्धारित है, जो 400 किलोवॉट तक के लोड वाली कॉलोनियों पर लागू है।

इस शुल्क में लाइन विस्तार, मीटर और केबल का खर्च भी शामिल होता है। शुल्क जमा होने के बाद ही नए कनेक्शन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। लेकिन रहवासियों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि अचानक जमा करना उनके लिए मुश्किल है।

 

7,900 से अधिक कॉलोनियां प्रभावित, 30 हजार उपभोक्ता संकट में

यह मामला केवल भावना परिसर तक सीमित नहीं है। जिले में 300 से अधिक अवैध या अविकसित कॉलोनियां चिह्नित की गई हैं, जहां मूलभूत बिजली अधोसंरचना का अभाव है। पूरे प्रदेश में ऐसी कॉलोनियों की संख्या 7,900 से अधिक बताई जा रही है। जिले में ही 30 हजार से ज्यादा उपभोक्ता इस स्थिति से प्रभावित हैं।

अब सवाल यह है कि बिल्डर की लापरवाही की कीमत आखिर आम रहवासी क्यों चुकाएं? क्या सरकार और बिजली कंपनी इस संकट का कोई व्यावहारिक समाधान निकाल पाएगी, या हजारों परिवार अंधेरे के साये में जाने को मजबूर होंगे?


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meena

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