MP में 10000 से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी पर मंडराया खतरा, ये है वजह
Tuesday, Jan 20, 2026-02:27 PM (IST)
भोपाल : मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी पर 31 मार्च के बाद संकट के बादल मंडराने लगे हैं। वर्तमान में जिन एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारी कार्यरत हैं, उनकी टेंडर अवधि इसी तिथि को समाप्त हो रही है, लेकिन अब तक नई निविदा प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। ऐसे में समय पर नई एजेंसी के चयन और कर्मचारियों को बड़ा झटका लग सकता है।
ऊर्जा विभाग से जुड़े दस्तावेज अब तक अधूरे
सूत्रों के अनुसार ऊर्जा विभाग से टेंडर प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक दस्तावेज अब तक तैयार नहीं हो सके हैं। इसी कारण विद्युत वितरण कंपनियां नई निविदा प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा पा रही हैं। इस देरी का सीधा असर जिले सहित पूरे पूर्व क्षेत्र में कार्यरत 12 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो वर्षों से मीटर रीडिंग, लाइन मेंटेनेंस, बिलिंग और कार्यालयीन कार्यों में सेवाएं दे रहे हैं।
हर साल बदलती है एजेंसी, कर्मचारी वही रहते हैं
जानकारों की मानें तो विद्युत वितरण कंपनियों में आउटसोर्स नियुक्ति पूरी तरह टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से होती है और हर वर्ष 31 मार्च को इसकी अवधि समाप्त हो जाती है। आमतौर पर एजेंसी बदलती है, लेकिन कर्मचारी उसी स्थान पर काम करते रहते हैं, केवल उनका नियोक्ता बदल जाता है। नई निविदा प्रक्रिया सामान्यतः दो महीने पहले शुरू कर दी जाती है, क्योंकि टेंडर कई चरणों में पूरा होता है और इसमें पर्याप्त समय लगता है।
संयुक्त टेंडर प्रणाली पर अटका मामला
बताया जा रहा है कि इस बार ऊर्जा विभाग बीते करीब डेढ़ साल से एक नई संयुक्त टेंडर प्रणाली के दस्तावेज तैयार कर रहा है। इसके तहत प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों के लिए एक साथ आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी निविदा निकाली जानी है। फिलहाल अधिकारी ऊर्जा विभाग के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी के मानव संसाधन विभाग प्रमुख राजीव गुप्ता ने बताया कि ऊर्जा विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद ही नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

