मध्य प्रदेश में इन कलेक्टर्स का कट सकता है पत्ता, इन वजहों से होगा प्रशासनिक स्ट्राइक
Monday, Feb 16, 2026-05:33 PM (IST)
(भोपाल): मध्य प्रदेश (MP) में पिछले दिनों आधी रात प्रशासनिक सर्जरी हुई थी, बहुत से अफसर यहां से वहां किए गए थे। लेकिन इसी बीच अभी और हलचल मचनी तय है। क्योंकि प्रदेश के कई जिलों के कलेक्टर बदलने पर विचार किया जा चुका है। इस बार भी कई कलेक्टरों के जिलों में बदलाव किया जा सकता है। इसके पीछे प्रमोशन, कार्यकाल और लापरवाही अहम वजहे सामने आ रही हैं।
भागीरथपुरा दूषित जल घटना को लकेर इंदौर कलेक्टर राडार पर
भागीरथपुरा दूषित जल घटना को लकेर इंदौर कलेक्टर राडार पर हैं क्योंकि इस घटना के बाद पूरे देश और प्रदेस में इंदौर का नाम उछला था। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा कलेक्टर बनाए जाने से पहले निगमायुक्त थे। हालांकि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद तत्कालीन आयुक्त दिलीप यादव पर गाज गिरी थी लेकिन इस घटना पर मामले की जिम्मेदारी कलेक्टर शिवम वर्मा की भी थी। जाहिर है उन पर गाज गिर सकती है।
ग्वालियर के कलेक्टर भी रडार पर
इसी कड़ी में अगले नंबर पर ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान का नाम आ रहा है। पिछले महीने ही एक प्रशासनिक लापरवाही के लिए उनको जिम्मेदार माना गया था, जिसके चलते उनके तबादले की भी संभावना जताई जा रही है।
भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह भी बदलेंगे
वैसे भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को सचिव पद पर प्रमोशन मिल चुका है लेकि आने वाले समय में उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय या किसी अन्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
शहडोल कलेक्टर केदार सिंह का रिटायरमेंट है इसी साल
पिछले दिनों सीएम मोहन यादव के शहडोल दौरे के दौरान कलेक्टर केदार सिंह के निर्देश पर पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज हुआ था। इस मुद्दे को लेकर भी कांग्रेस आक्रोशित है। इसको लेकर सरकार अक्रामक रूख अपना सकती है। वैसे कलेक्टर केदार सिंह का रिटायरमेंट इसी साल है।
वहीं बात करें दूसरे अधिकारियों की तो शिवपुरी कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी के तीन साल पूरे हो चुके हैं। उनका रिटायरमेंट नवंबर महीने में होना है। धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। जबकि मैहर कलेक्टर रानी बाटड़ के भी तीन साल हो चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक अब करीब 17 जिलों में पदस्थ आईएएस अफसरों के तबादले किए जा सकते हैं। लिहाजा अब फिर से बडे स्तर पर प्रशासनिक फेर बदल हो सकता है।

