MP में किसान ने उगाया काला टमाटर, फायदे और कीमत जानकर हैरान रह जाएंगे आप

Thursday, Feb 05, 2026-01:22 PM (IST)

बैतूल : मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में खेती की दुनिया में एक नया अध्याय जुड़ गया है। जिले के उन्नत कृषक अनिल वर्मा ने पहली बार काले टमाटर की सफल खेती कर यह साबित कर दिया है कि नवाचार और तकनीक से किसान अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं। गहरे बैंगनी-काले रंग का यह टमाटर न सिर्फ देखने में अलग है, बल्कि स्वाद, पोषण और बाजार कीमत में भी सामान्य लाल टमाटर से कई कदम आगे है। फिलहाल बाजार में इसकी कीमत करीब एक हजार रुपए प्रति किलो तक पहुंच रही है। काला टमाटर मूल रूप से अमेरिका में विकसित किया गया था और अब अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, इटली, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इसकी खेती होती है।

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भारत में यह अभी प्रयोग के दौर में है, लेकिन बैतूल के किसान अनिल वर्मा ने इसे अपनाकर जिले में नई राह खोल दी है। उन्होंने बताया कि बीज विदेश से मंगवाए गए, जिनकी कीमत लगभग 3000 रुपए में 60 से 70 दाने पड़ी। बावजूद इसके, फसल की ऊंची कीमत से लागत आसानी से निकल आती है। अनिल वर्मा के खेत में उगा एक काला टमाटर 350 से 400 ग्राम तक का है, यानी सामान्य टमाटर से कहीं बड़ा और भारी। इसका स्वाद हल्का मीठा और कम खट्टा होता है, जिससे सलाद, सूप और खास व्यंजनों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। होटल और हेल्थ फूड बाजारों में इसे 'प्रीमियम सुपरफूड' के रूप में देखा जा रहा है।

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विशेषज्ञों के अनुसार काले टमाटर में विटामिन ए, सी और के के साथ-साथ एंथोसायनिन और लाइकोपीन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। ये तत्व हृदय रोग, कैंसर, सूजन और आंखों से जुड़ी समस्याओं से बचाव में मदद करते हैं। यही वजह है कि विदेशों में इसे सुपरफूड की श्रेणी में रखा गया है और अब भारत में भी इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है। अनिल वर्मा का कहना है कि कम क्षेत्र में ज्यादा मुनाफा देने वाली यह फसल किसानों के लिए भविष्य की खेती का मजबूत विकल्प बन सकती है। बदलते मौसम, बढ़ती लागत और घटती आमदनी के दौर में काला टमाटर जैसी हाई-वैल्यू फसलें खेती को फिर से फायदे का सौदा बना सकती हैं।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि काले टमाटर की खेती को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ावा दिया जाए तो बैतूल जैसे जिले नई पहचान बना सकते हैं। यहां की जलवायु और मिट्टी इसके लिए अनुकूल मानी जा रही है। अनिल वर्मा की सफलता से प्रेरित होकर अब अन्य किसान भी इस फसल को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।


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meena

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