MP में स्वास्थ्य विभाग में बड़ा कांड! व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेजों से की सालों सरकारी नौकरी, 3 जगह पदस्थापना का रिकॉर्ड, ऐसे हुआ खुलासा
Thursday, Jul 16, 2026-09:20 PM (IST)
शहडोल (कैलाश लालवानी) : शहडोल में सामने आए कथित फर्जी डॉक्टर मामले ने अब प्रदेश की राजनीति और स्वास्थ्य विभाग में हलचल मचा दी है। इस मामले में डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि फर्जी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर, सेवा समाप्ति और अब तक लिए गए वेतन की वसूली की जाएगी। इतना ही नहीं, जिन अधिकारियों की निगरानी में यह पूरा मामला वर्षों तक चलता रहा, उनकी जवाबदेही भी तय होगी। वहीं, नवागत एसपी संजय कुमार अग्रवाल ने शिकायत के आधार पर जांच कर वैधानिक कार्रवाई की बात कही है।

रीवा लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद सामने आए इस मामले में जांच के दौरान खुलासा हुआ कि जिस व्यक्ति ने मध्यप्रदेश में डॉक्टर बनकर वर्षों तक नौकरी की, उसने कथित तौर पर राजस्थान के भरतपुर निवासी असली डॉक्टर महेश चंद्र शर्मा के शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। जांच में यह भी सामने आया कि उसके नाम पर शहडोल, श्योपुर और खरगोन जैसे तीन जिलों में पदस्थापना दर्ज थी। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इधर, असली डॉ. महेश चंद्र शर्मा स्वयं शहडोल पहुंचे और जयसिंहनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि उनके रिश्ते के चाचा सतीश शर्मा ने उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर सरकारी नौकरी हासिल की। पुलिस शिकायत के आधार पर पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

इस पूरे मामले पर डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में किए गए डिजिटलीकरण के कारण ही इस तरह के फर्जी मामलों का खुलासा संभव हो पाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सेवा समाप्त की जाएगी और नौकरी के दौरान लिया गया पूरा वेतन भी वसूला जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति वर्षों तक फर्जी तरीके से नौकरी करता रहा तो इसकी जिम्मेदारी केवल उसी की नहीं है। जिन अधिकारियों ने उसकी उपस्थिति दर्ज की, रिपोर्टिंग की और निगरानी में लापरवाही बरती, उनके खिलाफ भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई होगी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा शासन को कितना आर्थिक नुकसान पहुंचा।

