E20 पेट्रोल विवाद में पहली बड़ी जीत, रायपुर कोर्ट ने कंपनी को कार बदलने का दिया आदेश, जानें पूरा मामला
Thursday, Jul 16, 2026-08:10 PM (IST)
डेस्क: E20 पेट्रोल विवाद में रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कंपनी को 45 दिन में नई कार देने या 20.50 लाख से अधिक का भुगतान करने का आदेश सुनाया। ई20 पेट्रोल से वाहन खराब होने को लेकर देश भर में चर्चा तेज है। इस बीच पेट्रोल से वाहन में खराबी को लेकर आए देश के पहले फैसले में अदालत ने उपभोक्ता को राहत पहुंचाई है। कार मालिक ने आरोप लगाया था कि ई20 पेट्रोल ने उसकी गाड़ी को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद रायपुर जिला उपभोक्ता अदालत ने कार मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया है।
साथ ही, अदालत ने कंपनी और संबंधित पक्षकारों को कार मालिक की शिकायत को देखते हुए वाहन बदलने या निर्धारित राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में परिवाद की ऑनलाइन 12 मार्च 2025 को की गई थी, जबकि इसका पंजीयन 16 अप्रैल 2025 को हुआ। 14 जुलाई को आयोग ने अपना आदेश जारी किया।
उपभोक्ता प्रेमराज देवता ने आरोप लगाया था कि उनकी मारुति ग्रैंड विटारा कार में ई20 पेट्रोल के उपयोग के बाद बार-बार समस्याएं आने लगीं। शिकायत में इंजन संबंधी परेशानी, परफॉर्मेंस के खराब होने, मिसफायरिंग और लगातार माइलेज घटने जैसी समस्याओं का जिक्र किया गया। उपभोक्ता का कहना था कि ई20 पेट्रोल के उपयोग के बाद वाहन की समस्या दूर नहीं हुई, जबकि कई बार सर्विस सेंटर में जांच और मरम्मत कराई गई।आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया।
आयोग ने माना कि ई20 पेट्रोल के संबंध में उपभोक्ता के पास व्यवहारिक रूप से अन्य ईंधन विकल्प उपलब्ध नहीं था, क्योंकि अधिकांश पेट्रोल पंपों पर यही ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा था।आयोग ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया कि वे उपभोक्ता की कार वापस लेकर उसी मॉडल की नई ई20 ईंधन समर्थित कार आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर उपलब्ध कराएं। अगर निर्धारित अवधि में वाहन नहीं बदला जाता है, तो विपक्षी पक्षकारों को वाहन की कीमत और संबंधित खर्चों का भुगतान (कुल राशि 20,50,494) करना होगा।
आयोग ने यह भी आदेश दिया कि संबंधित पक्षकारों को मानसिक क्षति और वाद व्यय की राशि भी अदा करनी होगी। आयोग ने उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए एक लाख रुपए और मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपए का भुगतान करने को कहा है। आदेश में कहा गया कि राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर नहीं किया जाता है, तो भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

