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स्थानीय भाषा बोलने पर चार वर्षीय बच्चे को एडमिशन से इनकार, निजी स्कूल पर उठे सवाल, पूर्व डिप्टी सीएम ने की सख्त कार्रवाई की मांग

Friday, Apr 17, 2026-05:39 PM (IST)

अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से शुक्रवार को एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां स्थानीय बोली सरगुजिया बोलने के कारण एक चार वर्षीय बच्चे को निजी स्कूल में प्रवेश देने से मना कर दिया गया। यह मामला शहर स्थित सौरंग किड्स एकेडमी से जुड़ा है। परिजनों के अनुसार, बच्चे को पहले एक सप्ताह तक डेमो क्लास में रखा गया लेकिन बाद में स्कूल प्रबंधन ने यह कहते हुए एडमिशन देने से इनकार कर दिया कि बच्चा सरगुजिया भाषा बोलता है, जिससे अन्य बच्चों पर प्रभाव पड़ सकता है। घटना के सार्वजनिक होने के बाद क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है।

स्थानीय लोग इसे क्षेत्रीय भाषा और सांस्कृतिक अस्मिता से जोड़कर देख रहे हैं और जिम्मेदारों पर कारर्वाई की मांग कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा कलेक्टर अजीत बसंत ने शिक्षा विभाग को जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर उचित कारर्वाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस प्रकरण पर पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, 'यदि सरगुजा में ही सरगुजिया भाषा बोलने पर बच्चे को एडमिशन नहीं दिया जा रहा है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।' उन्होंने शिक्षा विभाग से तत्काल जांच की मांग करते हुए कहा कि 'ऐसे स्कूल को तत्काल बंद कर देना चाहिए।' वहीं शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा, 'जिला शिक्षा अधिकारी को संबंधित स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है। जांच में अगर दोषी पाया गया तो नियमानुसार कारर्वाई की जाएगी, ताकि किसी भी स्कूल में इस तरह की पुनरावृत्ति ना हो। हम प्रयास कर रहे हैं कि मातृभाषा के अलावा स्थानीय बोलियों को भी प्राथमिकता में लें। हल्बी, गोंडी, सरगुजिया सबको हमने सहायक भाषा के रूप में लिया है। कोई भी स्कूल ऐसा कृत्य करता है तो सख्त कारर्वाई होगी।' 


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Content Writer

meena

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