IAS संतोष वर्मा की बढ़ सकती है मुश्किलें! केंद्र तक पहुंचा मामला, सांसद ने लगाए गंभीर आरोप
Saturday, Nov 29, 2025-02:28 PM (IST)
रीवा (गोविंद सिंह) : ब्राह्मण बेटियों पर अशोभनीय बयान देकर विवादों में आए आईएएस संतोष वर्मा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय से संतोष वर्मा के आईएएस अवॉर्ड की फिर से जांच कराने की मांग उठाई है। इस संबंध में सांसद मिश्रा ने केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर वर्मा द्वारा मप्र में जातिगत विद्वेष फैलाने की शिकायत की है।

सांसद मिश्र ने अपने पत्र में लिखा है कि IAS संतोष वर्मा द्वारा की गई टिप्पणी “अशोभनीय, अपमानजनक और सामाजिक रूप से संवेदनशील” है, जो कथित रूप से जातिगत विद्वेष को बढ़ावा देने वाली हो सकती है। पत्र में यह भी कहा गया है कि यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण को केन्द्र में रखकर चलाए जा रहे अभियानों के विपरीत मानसिकता को दर्शाता है। सांसद ने लिखा कि इस प्रकार की टिप्पणी अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम 1968 के स्पष्ट उल्लंघन की श्रेणी में आ सकती है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए IAS अधिकारियों पर लागू होने वाले अनुशासनात्मक नियमों के तहत उचित कार्रवाई की जाए।

सांसद जनार्धन मिश्रा ने दावा किया कि संतोष वर्मा मूल रूप से अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के अधिकारी रहे हैं, लेकिन भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन के लिए उन्होंने स्वयं को अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग का बताया। सांसद ने इस संबंध में भी जांच की मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि चयन प्रक्रिया में सभी मानदंडों का पालन हुआ था या नहीं। इसके साथ ही वर्ष 2021 में एक महिला के साथ मारपीट और अश्लील शब्दों के प्रयोग के मामले में लंबित केस के अदालत का फर्जी आदेश पेश करने के मामले में फिर से जांच की मांग उठाई है।

सांसद ने कहा कि ऐसे लोगों के कारण उनका मन पीड़ा से भर जाता है, खासकर वर्मा द्वारा उनकी बेटी के लिए बोले गए शब्दों के कारण। उन्होंने सरकार से तत्काल कार्यवाही करने का आवाहन किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो वह सनातन मानने वालों से पूछेंगे कि उन्हें क्या करना है। उन्होंने समाज को तोड़ने और बांटने का काम करने वाले ऐसे लोगों की कड़ी निंदा की।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि कुछ लोगों को बागेश्वर महाराज का "जात-पात की करो विदाई, हम सब हिन्दू भाई-भाई" का संदेश समझ नहीं आया। उन्होंने कहा कि समाज में कई चीजें अमृत के समान होती हैं, लेकिन कुछ लोगों को वह अमृत भी हज़म नहीं होता।

