खंभे से बांधा, जूतों की माला पहनाई फिर दे दनादन, आधी रात को प्रेमिका से मिलने पहुंचे प्रेमी के साथ हैवानियत की हदें पार
Tuesday, Jun 30, 2026-04:05 PM (IST)
नीमच (मूलचंद खींची) : मध्यप्रदेश के नीमच जिले में कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए रूह कपा देने वाली बर्बरता का एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर आपकी रूह कांप जाएगी। जहां एक 22 साल के युवक को न सिर्फ रस्सी से बांधकर बेरहमी से पीटा गया, बल्कि उसके गले में जूतों का हार डालकर सरेआम जलील किया गया।
आधी रात का 'डेथ ट्रैप' (Death Trap)
मामला कुकडेश्वर थाना क्षेत्र के गांव सेमली इस्तमुरार का है। चिकली गांव का रहने वाला श्रवण चावड़ा (22 वर्ष) रविवार की देर रात करीब 2 बजे अपने रिश्तेदार कंवरलाल बंजारा के घर पहुंचा था। लेकिन उसे क्या पता था कि जिस घर में वो कदम रख रहा है, वहां पहले से ही मौत का तांडव उसका इंतजार कर रहा है। घर के लोगों ने 'चोर-चोर' का हल्ला मचाया और श्रवण को दबोच लिया। इसके बाद जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया!
खूंटे से बांधकर लाठियों की बरसात
युवक को रस्सी से जकड़ दिया गया और फिर लाठियों से तब तक पीटा गया जब तक कि उसका चेहरा लहूलुहान नहीं हो गया।
जूतों की माला और जलालत
हैवानियत यहीं नहीं रुकी! युवक के गले में जूतों की माला डाल दी गई और उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।
घंटों तक टॉर्चर
रात 2 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक युवक उस 'टॉर्चर रूम' में तड़पता रहा।
ट्विस्ट: चोरी तो सिर्फ बहाना था, असली माजरा 'आशिकी' का था
शुरुआत में इस खूनी खेल को 'चोरी की आशंका' का नाम दिया जा रहा था, लेकिन जैसे ही पुलिस की एंट्री हुई, कहानी में एक बड़ा और सनसनीखेज ट्विस्ट आ गया! सूत्रों और पुलिस के मुताबिक, यह पूरा मामला प्रेम प्रसंग (Love Affair) से जुड़ा हुआ है। चोरी का मुखौटा पहनकर आशिक को सबक सिखाने की खौफनाक साजिश रची गई थी!
पुलिस की कार्रवाई: एक्शन भी और 'समझौता' भी!
सुबह जैसे ही लहूलुहान हालत में युवक कुकडेश्वर थाने पहुंचा, पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए मुख्य आरोपी कंवरलाल बंजारा और कमलीबाई के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
थाना प्रभारी भीमसिंह सिसौदिया का बयान
मामला प्रेम प्रसंग का ही है। एक महिला सहित दो लोगों पर कार्रवाई की गई है। हालांकि, इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और मारपीट के बाद अब दोनों पक्षों में आपसी समझौते की बात भी सामने आ रही है।
बड़ा सवाल
क्या आपसी समझौते से पीठ पर पड़े लाठियों के निशान मिट जाएंगे? क्या कानून को हाथ में लेकर इस तरह सरेआम 'तालिबानी इंसाफ' करने की छूट किसी को भी दी जा सकती है?

