दतिया हार के बाद नरोत्तम मिश्रा ने तोड़ी चुप्पी, आशुतोष तिवारी को लेकर कही ऐसी बात जिसने सबको चौंका दिया
Wednesday, Aug 05, 2026-01:31 PM (IST)
दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद पहली बार पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का सार्वजनिक बयान सामने आया है। चुनाव परिणाम के बाद लगातार यह चर्चा चल रही थी कि टिकट कटने और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के कारण दोनों नेताओं के बीच मतभेद हैं। अब डॉ. मिश्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इन सभी अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के बीच किसी प्रकार की कोई कटुता नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे दावों को पूरी तरह भ्रामक और असत्य बताते हुए कहा कि आशुतोष तिवारी मेरे अनुज हैं। उनके प्रति मेरे मन में हमेशा स्नेह और आत्मीयता रही है और आगे भी रहेगी। हमारे बीच न कभी कोई विवाद था और न आज है।
उन्होंने बताया कि चुनाव परिणाम के बाद भी उनकी मुलाकात पहले की तरह आत्मीय वातावरण में हुई। डॉ. मिश्रा ने आशुतोष तिवारी को भाजपा का कर्मठ, समर्पित और मेहनती कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि वे उन्हें वर्ष 2003 से जानते हैं और उनकी कार्यशैली को करीब से देखा है। उन्हें विश्वास है कि आशुतोष संगठन और जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।

पूर्व गृहमंत्री ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से भी भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि कोई भी ऐसा कार्य, टिप्पणी या व्यवहार न करें जिससे पार्टी, संगठन या आशुतोष तिवारी को किसी प्रकार की क्षति पहुंचे। उन्होंने कहा कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता, अनुशासन और संस्कार हैं।
डॉ. मिश्रा ने यह भी कहा कि उनका और आशुतोष तिवारी का करीब 25 वर्षों का पारिवारिक रिश्ता है। उन्होंने लिखा, वह सदैव मेरे अनुज हैं और मैं उनका अभिभावक। यह रिश्ता राजनीति से ऊपर है और हमेशा बना रहेगा। राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन परिवार, संस्कार और रिश्ते हमेशा स्थायी रहते हैं।
गौरतलब है कि दतिया उपचुनाव में भाजपा ने इस बार डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि भाजपा को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद पार्टी ने दतिया जिले की पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर संगठन में बड़ा बदलाव किया। ऐसे राजनीतिक माहौल के बीच डॉ. मिश्रा का यह बयान कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है।

