मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस के नए चेहरे ने बढ़ाई टेंशन, भाजपा में सियासी हलचल तेज
Friday, Mar 13, 2026-01:14 PM (IST)
भोपाल : मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए जून में होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों दलों में उम्मीदवारों को लेकर दावेदार सक्रिय हो गए हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में नया समीकरण बनता दिखाई दे रहा है। इन तीन सीटों में से दो सीटें भाजपा के खाते में और एक सीट कांग्रेस के खाते में मानी जा रही है। ऐसे में नेताओं ने राज्यसभा तक पहुंचने के लिए अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीतियां तैयार करनी शुरू कर दी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले तीन महीने प्रदेश की राजनीति के लिहाज से काफी हलचल भरे रहने वाले हैं।
जून में खाली होंगी तीन सीटें
मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें जून 2026 में खाली हो रही हैं। इन सीटों में दो पर भाजपा के सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जबकि एक सीट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पास है। दिग्विजय सिंह पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि वे दोबारा राज्यसभा जाने के इच्छुक नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस में नए चेहरे को मौका मिलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसी कारण पार्टी के भीतर कई नेता सक्रिय होकर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुट गए हैं।
कांग्रेस में नए चेहरे की चर्चा
कांग्रेस में इस बार नया चेहरा राज्यसभा भेजे जाने की संभावना ज्यादा बताई जा रही है। दिग्विजय सिंह के पीछे हटने के बाद कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम सबसे प्रमुख माना जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और पूर्व सांसद मोनाक्षी नटराजन भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं। यदि पार्टी अनुसूचित जाति वर्ग से किसी नेता को अवसर देती है, तो पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा और प्रदीप अहिरवार के नाम भी चर्चा में हैं। इन संभावित नामों ने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को काफी रोचक बना दिया है।
भाजपा में भी दावेदारों की लंबी सूची
भाजपा में भी राज्यसभा की दो सीटों के लिए कई वरिष्ठ नेता सक्रिय हो गए हैं। मौजूदा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन को दोबारा मौका मिल सकता है, हालांकि पार्टी के भीतर अन्य दावेदार भी मजबूत तरीके से सामने आ रहे हैं। भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं, जिनमें पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, जयभान सिंह पवैया और लाल सिंह आर्य जैसे नेता शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व ही करेगा, लेकिन दावेदारों की बढ़ती संख्या से पार्टी के भीतर राजनीतिक समीकरण दिलचस्प हो गए हैं।
कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में होने वाले आगामी राज्यसभा चुनाव ने भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के भीतर हलचल बढ़ा दी है। दावेदारों की बढ़ती संख्या और बदलते राजनीतिक समीकरणों के चलते आने वाले महीनों में प्रदेश की राजनीति और भी रोचक होने की संभावना है।

