आम आदमी की तरह साइकिल से निकले कलेक्टर साहब! जमीन पर बैठकर सुनी जनता की फरियाद, सादगी की हर कोई कर रहा तारीफ
Tuesday, Jun 02, 2026-01:46 PM (IST)
सीधी (सूरज शुक्ला) : सादगी ऐसी कि देखने वाला हर कोई हैरान, हम बात कर रहे हैं सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा की। जो लाइम लाइट से दूर साधारण आदमी की तरह साइकिल से कलेक्ट्रेट पहुंचे। हालांकि अन्य कई अधिकारी अपनी गाड़ियों से आते दिखाई दिए। इतना ही नहीं उन्होंने आम लोगों की समस्याएं भी बड़ेप्यार से जमीन पर बैठकर सुनी। कलेक्टर साहब की इस सादगी की हर कोई तारीफ कर रहा है।

दरअसल, जिला पंचायत सभागार में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था का एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। जिसने शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल भी खड़े किए वहीं कलेक्टर साहब की सादगी भरी तस्वीर देखने को मिली। मानों कलेक्टर साहब ने पूरी महफिल ही लूट ली हो। एक ओर जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा आम लोगों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते नजर आए, तो दूसरी ओर अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी कुर्सियों पर बैठकर आराम फरमाते दिखाई दिए। कुछ अधिकारी तो जनसुनवाई के दौरान मोबाइल फोन में व्यस्त भी नजर आए, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ मानों आमजन की समस्याओं से उनका कोई सरोकार ही नहीं है।

जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों और फरियादियों के बीच बैठकर कलेक्टर विकास मिश्रा ने सीधे संवाद स्थापित किया और उनकी समस्याएं सुनीं। कलेक्टर का यह व्यवहार जहां एक संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी की छवि प्रस्तुत कर रहा था, वहीं सभागार में मौजूद अन्य अधिकारियों का रवैया इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दिया।

हैरानी की बात यह रही कि कलेक्टर विकास मिश्रा स्वयं साइकिल चलाकर कलेक्ट्रेट से जिला पंचायत सभागार पहुंचे, जबकि अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी महज कुछ सौ मीटर की दूरी तय करने के लिए भी चारपहिया वाहनों का उपयोग करते नजर आए। उल्लेखनीय है कि रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद पूर्व में अधिकारियों और कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से चारपहिया वाहनों का उपयोग कम करने की सलाह दे चुके हैं। कलेक्टर ने इस संदेश को व्यवहार में उतारा, लेकिन अन्य अधिकारी उस दिशा में गंभीर नहीं दिखे।

इतना ही नहीं, जनसुनवाई के दौरान अधिकांश अधिकारी और कर्मचारियों के गले में परिचय-पत्र (आईडी कार्ड) भी नहीं दिखाई दिए। जबकि कलेक्टर द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यालय एवं संस्थान में प्रवेश के दौरान परिचय-पत्र अनिवार्य रूप से धारण करें। मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे आयोजित जनसुनवाई में इन निर्देशों की खुली अनदेखी देखने को मिली।
जनसुनवाई जैसे महत्वपूर्ण मंच पर सामने आए इस दृश्य ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब जिले का मुखिया स्वयं सादगी, अनुशासन और जनसेवा का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, तब क्या बाकी प्रशासनिक अमला उसके संदेश और निर्देशों को गंभीरता से लेने को तैयार है?

