कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा की विधायकी खत्म होते ही उठा बीना विधानसभा का मुद्दा...क्या जाएगी निर्मला स्प्रे की विधायकी?
Monday, Mar 09, 2026-06:17 PM (IST)
भोपाल : 9 मार्च को ग्वालियर बेंच की कोर्ट के एक बड़े फैसले ने मध्य प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया। जहां जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया की एकलपीठ ने विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित कर दिया है। अदालत ने यह फैसला पूर्व मंत्री और भाजपा नेता रामनिवास रावत द्वारा दायर चुनाव याचिका पर सुनाया। इस फैसले के बाद जहां प्रदेशभर में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं बीना विधायक निर्मला सप्रे की विधायकी को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
बीना विधायक निर्मला सप्रे मामले में भी उठी कार्रवाई की मांग
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में अन्य मामलों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासतौर पर बीना की विधायक निर्मला सप्रे से जुड़े मामले में भी कार्रवाई की मांग उठने लगी है। निर्मला सप्रे जो बीना से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंची थी, लेकिन ज्यादातर भाजपा के मंच पर नजर आती हैं। उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने के लिए खुद कांग्रेस पार्टी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। लेकिन उस पर अभी तक कोई फैसला नहीं आ सका है और निर्मला सप्रे की विधायकी पर सस्पेंस बरकरार है।

ये है पूरा मामला
दरअसल, निर्मला सप्रे बीना से कांग्रेस की टिकट पर जीत तो गई लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार न बन सकी। ऐसे में निर्मला सप्रे ने 5 मई 2024 को लोकसभा चुनावी प्रचार में राहतगढ़ में सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ मंच सांझा किया तो राजनीति में तहलका मच गया। इतना ही नहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के हाथों मंच पर भाजपा का गमछा गले में डाला और यह ऐलान किया गया कि निर्मला सप्रे ने बीजेपी जॉइन कर ली है। सप्रे ने भी कहा कि वे बीना के विकास के लिए बीजेपी के साथ आई हैं। लेकिन वे औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता नहीं ले पाई। इसके बाद उन्होंने भाजपा प्रत्याशी लता वानखेड़े के लिए चुनाव प्रचार भी किया और कांग्रेस से दूरी बना ली।
कांग्रेस ने एक्शन की तैयारी
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 7 जुलाई 2024 को विधानसभा में मानसून सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष को निर्मला स्प्रे की सदस्यता खत्म करने का आवेदन दिया। लेकिन करीब ढाई महीने बाद जवाब आया कि आपकी याचिका के दस्तावेज गुम हो गए हैं। उसके बाद नेता प्रतिपक्ष ने दोबारा याचिका से संबंधित दस्तावेज स्पीकर को भेजे। जुलाई से 90 दिनों में जब स्पीकर की ओर से सप्रे की सदस्यता को लेकर निर्णय नहीं हुआ तो 28 नवंबर 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका लगाई। हालांकि कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, मोहन सरकार और निर्मला सप्रे से पूछा है कि दलबदल और निर्वाचन को आयोग्य ठहराने वाली याचिका वाली निर्मला सप्रे कौन हैं?
कांग्रेस हमलावर हुई
विधानसभा में मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 7 जुलाई 2024 को सप्रे की विधानसभा अध्यक्ष को सदस्यता खत्म करने का आवेदन दिया। करीब ढाई महीने बाद जवाब आया कि आपकी याचिका के दस्तावेज गुम हो गए हैं। उसके बाद नेता प्रतिपक्ष ने दोबारा याचिका से संबंधित दस्तावेज स्पीकर को भेजे। जुलाई से 90 दिनों में जब स्पीकर की ओर से सप्रे की सदस्यता को लेकर निर्णय नहीं हुआ तो 28 नवंबर 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका लगाई। अब हाईकोर्ट ने ताजा निर्देश देते हुए मामले में रोचक मोड़ ला दिया है।

