तबादला आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने वाले अधिकारी को बड़ा झटका
Friday, Apr 24, 2026-07:09 PM (IST)
भोपाल : मोरबा थाने में पदस्थ कार्यवाहक इंस्पेक्टर कपूर त्रिपाठी को अपने तबादले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना भारी पड़ गया। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी तबादला आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने दलील दी थी कि उन्होंने अपने वर्तमान पद पर निर्धारित दो वर्ष का कार्यकाल अभी पूरा नहीं किया है, इसलिए उनका ट्रांसफर नियमों के विपरीत है। शुरुआती सुनवाई में कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तबादले पर अंतरिम रोक भी लगा दी थी और पुलिस स्थापना बोर्ड से विस्तृत जवाब मांगा था।
मामले की अगली सुनवाई में पुलिस स्थापना बोर्ड ने कोर्ट के सामने जो तथ्य रखे, उन्होंने पूरे मामले का रुख बदल दिया। बोर्ड की ओर से बताया गया कि कपूर त्रिपाठी इंस्पेक्टर पद के लिए आवश्यक अनिवार्य आउटडोर एलिमेंट्री प्रशिक्षण को पूरा करने में असफल रहे हैं। रिकॉर्ड के अनुसार वे पूर्व में भी इस प्रशिक्षण में सफल नहीं हो सके थे और वर्ष 2025 में आयोजित परीक्षा में भी उन्होंने हिस्सा नहीं लिया। इस आधार पर बोर्ड ने उनके तबादले को पूरी तरह उचित और नियमसम्मत बताया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि केवल निर्धारित कार्यकाल पूरा न होना किसी अधिकारी को पद पर बनाए रखने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि संबंधित अधिकारी इंस्पेक्टर पद की आवश्यक योग्यता पूरी नहीं करते हैं, ऐसे में उन्हें थानेदार पद पर बनाए रखना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि पुलिस विभाग को अपने आंतरिक प्रशासनिक फैसले लेने का अधिकार है, बशर्ते वे नियमों के अनुरूप हों।
अंततः हाईकोर्ट ने कपूर त्रिपाठी की याचिका खारिज कर दी और पुलिस मुख्यालय के तबादला आदेश को वैध ठहरा दिया। इस फैसले के साथ ही यह स्पष्ट संदेश गया कि सरकारी सेवा में पद और जिम्मेदारी बनाए रखने के लिए केवल अनुभव ही नहीं, बल्कि आवश्यक प्रशिक्षण और योग्यता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यह निर्णय प्रशासनिक अनुशासन और पात्रता मानकों को बनाए रखने की दिशा में एक अहम उदाहरण माना जा रहा है।

