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राज्य की इस महिला नेत्री को BJP ने अचानक सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, जानिए क्या है अंदर का प्लान?

Thursday, Sep 24, 2026-04:01 PM (IST)

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में किए गए हालिया बदलाव के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नाम अब दूसरे राज्य की संगठनात्मक राजनीति में भी नजर आएगा। पत्थलगांव की विधायक और रायगढ़ की पूर्व सांसद गोमती साय को गुजरात भाजपा का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनके साथ अजय महावर को भी सह-प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है, जबकि तरुण चुघ को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है। गोमती साय की यह नियुक्ति इसलिए चर्चा में है, क्योंकि अब तक उनका प्रमुख राजनीतिक और संगठनात्मक कार्यक्षेत्र छत्तीसगढ़ रहा है। स्थानीय राजनीति से शुरुआत करने के बाद उन्होंने लोकसभा और विधानसभा दोनों स्तरों पर अपनी भूमिका निभाई। ऐसे में गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य में संगठन की जिम्मेदारी मिलना उनके राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय माना जा रहा है।

पंचायत से संसद और फिर विधानसभा तक का सफर

गोमती साय का राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से आगे बढ़ा है। वर्ष 2005 से 2010 के बीच उन्होंने जशपुर जिला पंचायत सदस्य के रूप में काम किया। इसके बाद उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। स्थानीय स्तर पर सक्रिय राजनीति के बाद भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें रायगढ़ से मैदान में उतारा, जहां उन्होंने जीत दर्ज कर संसद में प्रवेश किया। इसके बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पत्थलगांव सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस तरह गोमती साय को स्थानीय निकाय, लोकसभा और विधानसभा—तीनों स्तरों पर राजनीतिक कामकाज का अनुभव मिला। अब पार्टी संगठन ने उनके इसी व्यापक राजनीतिक अनुभव को छत्तीसगढ़ से बाहर इस्तेमाल करने की जिम्मेदारी दी है।

गुजरात की जिम्मेदारी का मतलब क्या है?

भाजपा में प्रदेश प्रभारी और सह-प्रभारी की भूमिका केवल चुनाव के समय तक सीमित नहीं होती। ये नेता प्रदेश संगठन के साथ समन्वय, पार्टी कार्यक्रमों की निगरानी, संगठनात्मक गतिविधियों और केंद्रीय नेतृत्व तथा राज्य इकाई के बीच संवाद जैसे कार्यों में भूमिका निभाते हैं। गुजरात में गोमती साय प्रभारी तरुण चुघ के साथ संगठनात्मक टीम का हिस्सा होंगी। यानी गुजरात का दायित्व उनके लिए अकेले की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पार्टी द्वारा बनाई गई एक व्यापक टीम के तहत उन्हें काम करना होगा।

हालांकि भाजपा ने गोमती साय को गुजरात भेजने के पीछे कोई विस्तृत आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए इसे किसी विशेष चुनावी रणनीति या आगामी राजनीतिक फैसले से सीधे जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि राष्ट्रीय संगठन ने उन्हें दूसरे राज्य में संगठनात्मक जिम्मेदारी के लिए चुना है।

महिला नेतृत्व को दूसरे राज्य में मिली जिम्मेदारी

गोमती साय की नियुक्ति का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला नेतृत्व से भी जुड़ा है। वह छत्तीसगढ़ में निर्वाचित जनप्रतिनिधि के तौर पर काम कर रही हैं और अब उन्हें राज्य से बाहर पार्टी संगठन में जिम्मेदारी मिली है। इस भूमिका के जरिए उन्हें गुजरात की राजनीतिक परिस्थितियों, संगठनात्मक ढांचे और पार्टी के स्थानीय नेटवर्क के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। साथ ही यह उनके लिए अपने अब तक के राजनीतिक अनुभव को एक नए प्रदेश में इस्तेमाल करने की चुनौती भी होगी।

छत्तीसगढ़ के एक और नेता को मिली बाहरी जिम्मेदारी

भाजपा के इसी संगठनात्मक फेरबदल में छत्तीसगढ़ के पूर्व विधायक सौरभ सिंह को भी दूसरे राज्य की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें झारखंड भाजपा का सह-प्रभारी बनाया गया है। झारखंड में गजेंद्र पटेल प्रभारी हैं, जबकि सौरभ सिंह के साथ निवेदिता सिंह को भी सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक ही संगठनात्मक बदलाव में छत्तीसगढ़ से जुड़े दो नेताओं को दूसरे राज्यों में भूमिका मिलना यह दिखाता है कि पार्टी अपने राज्य के नेताओं को राष्ट्रीय संगठनात्मक जिम्मेदारियों के लिए भी इस्तेमाल कर रही है।

अब गुजरात में सामने होगी नई चुनौती

गोमती साय के लिए गुजरात की जिम्मेदारी उनके राजनीतिक सफर का अलग तरह का अनुभव होगी। अभी तक उन्होंने जिस राजनीतिक क्षेत्र में काम किया, वह मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ रहा है। अब उन्हें दूसरे राज्य के संगठन के साथ समन्वय करते हुए पार्टी की गतिविधियों में भूमिका निभानी होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी गोमती साय को नई जिम्मेदारी मिलने पर बधाई दी है और उनके सार्वजनिक जीवन एवं जनसेवा के अनुभव का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि गोमती साय के अनुभव से गुजरात भाजपा को लाभ मिलेगा। फिलहाल इस नियुक्ति के बाद सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि गुजरात में गोमती साय को किस तरह के संगठनात्मक कार्य सौंपे जाते हैं और वह छत्तीसगढ़ में हासिल अपने राजनीतिक अनुभव को वहां पार्टी की गतिविधियों में किस तरह उपयोग करती हैं। इतना जरूर है कि राष्ट्रीय संगठन की नई जिम्मेदारी के साथ गोमती साय की राजनीतिक भूमिका अब छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहने वाली है।


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Content Editor

Himansh sharma

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