पुत्र मोह में IPS अफसर को खुलेआम धमकाने वाले BJP विधायक पर होगी कार्रवाई? गरमाई MP की सियासत
Monday, Apr 20, 2026-01:07 PM (IST)
शिवपुरी: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन पर करैरा एसडीओपी और आईपीएस अधिकारी आयुष जाखड़ को खुलेआम धमकाने के आरोप लगे हैं। मामला उनके बेटे दिनेश लोधी से जुड़ा है, जिसे हाल ही में थार वाहन एक्सीडेंट और नियम उल्लंघन के मामले में पुलिस ने पूछताछ के लिए थाने बुलाया था। जानकारी के अनुसार, करैरा एसडीओपी आयुष जाखड़ ने दिनेश लोधी को थाने बुलाकर सख्त चेतावनी दी थी। साथ ही ब्लैक फिल्म, हूटर और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर चालान काटते हुए ड्राइविंग लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया भी शुरू की गई। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जांच भी की थी।
इसी कार्रवाई के बाद विधायक प्रीतम सिंह लोधी का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे एसडीओपी पर नाराजगी जाहिर करते नजर आए। वीडियो में उन्होंने कहा—“करैरा तेरे डैडी का नहीं है। मेरा बेटा यहां आएगा भी, घूमेगा भी और चुनाव भी लड़ेगा। अगर दम है तो रोक कर दिखा। इतना ही नहीं, उन्होंने आगे कहा - हमारा इतिहास पता कर लेना और अपनी औकात में रहना। विधायक के इस बयान को कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन को खुली चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित है, खासकर तब जब मामला सीधे कानून के पालन और पुलिस कार्रवाई से जुड़ा हो।
यह पहली बार नहीं है जब प्रीतम सिंह लोधी अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले भी वे कई बार प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ तीखी टिप्पणी कर चुके हैं। उनके खिलाफ मध्य प्रदेश के कई थानों में विभिन्न मामले दर्ज बताए जाते हैं और कई मुकदमे अभी भी विचाराधीन हैं। वहीं, करैरा एसडीओपी आयुष जाखड़ ने विधायक के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
उनका कहना है कि पुलिस ने केवल नियमानुसार कार्रवाई की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूछताछ, चालान और लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी प्रक्रिया पूरी तरह कानून के तहत की गई है और इसमें किसी प्रकार की व्यक्तिगत भावना नहीं थी। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या विधायक के इस बयान पर कोई कानूनी कार्रवाई होगी, या मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा। प्रशासनिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देखा जा रहा है।

