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लाकडाउन अफवाह और युद्ध के बीच खाद्य तेल में लगी आग, 300 रुपये तक बढ़ गए दाम

Saturday, Mar 28, 2026-05:26 PM (IST)

(रायपुर): विश्व तनाव और खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध से चीजों की कीमतें में उछाल आ रहा है। पहले गैस की दिक्कत फिर पेट्रोल डीलज के लिए मारामारी देखी गई। अब  हालात ऐसे हो रहे हैं कि  खाद्य तेल की कीमत में भी आग लग गई है। आम जनता के साथ ही व्यापारी भी अब महंगा खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

बात अगर गोलबाजार के थोक व्यापारियों की करें तो उनके अनुसार पिछले एक सप्ताह में रसोई का बजट भी बिगड़ने वाला है क्योंकि  खाद्य तेलों के दाम 140 रुपए से लेकर 300 रुपए प्रति टिन (13 से 15 किलो) तक बढ़ गए हैं। 300 रुपये प्रति टिन की बढ़ौतरी कम नहीं है। महंगाई का ये तड़का रसोई में नहीं लग रहा है बल्कि और चीजों में भी प्रभाव पड़ रहा है।   

प्लास्टिक बोतल और डिस्पोजल सामग्री के दामों में भी उछाल आया है।  डिस्पोजल सामान में प्रति बंडल 5 से 10 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। जो उपभोक्ताओं की जेब ढीली कर सकता है। लेकिन चिंता की बात खाद्य तेल को लेकर है जो 300 रुपए प्रति टिन महंगा हो गया है।

खाद्य तेल की कीमतें बढ़ने का कारण

दरअसल भारत खाद्य तेल का मुख्यत  Importer ही है, मतलब कि भारत बड़ी मात्रा में खाद्य तेल को बाहर से खरीदता है। इस तेल का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से होकर आता है,लेकिन वहां हालात कैसे हैं सभी को पता है, युद्ध के कारण सप्लाई  प्रभावित हो रही है जिससे माल ढुलाई  महंगी हो गई है और कीमतों में उछाल आ रहा है।  कच्चे तेल के दाम बढऩे से ट्रांसपोर्ट और पैकेजिंग की लागत में बढ़ौतरी हो गई है। पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल के दाम बढ़ने का असर भारत के बाजार पर पड़ रहा है।

इन सबके बीच ही लॉकडाउन की अफवाह भी कुछ प्रभाव डाल रही है। लोग जरूरत से ज्यादा सामान खरीदने लगे हैं। लोगों को डर सता रहा है कि यदि लॉकडाउन लग जाता है तो आवश्यक चीजों की कमी हो सकती है, इसके चलते वो पहले से स्टॉक करने में जुट गए हैं।


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Content Editor

Desh Raj

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