पुलिस कमिश्नर का बड़ा एक्शन! टीआई को डिमोट कर बनाया SI, गंभीर आरोपों में फंसे; जानें पूरा मामला
Thursday, Aug 06, 2026-04:46 PM (IST)
इंदौर (सचिन बहरानी): पुलिस महकमे में खाकी की साख को बट्टा लगाने वाले अफसरों के खिलाफ पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने ऐतिहासिक और सख्त कार्रवाई की है। खजराना थाने के पूर्व थाना प्रभारी दिनेश वर्मा को विवेचना में गंभीर फर्जीवाड़े और लीपापोती का दोषी पाए जाने पर डिमोट कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर ने पूर्व टीआई दिनेश वर्मा का पद घटाकर उन्हें निरीक्षक से सीधे उपनिरीक्षक (एसआई) बना दिया है। विभागीय जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि खजराना थाने में अपनी पदस्थापना के दौरान दिनेश वर्मा ने 1240 से अधिक संगीन मुकदमों में केवल दो ही पसंदीदा लोगों को हर केस का गवाह बना डाला था। पुलिस महकमे में हुई इस बड़ी कार्रवाई से हड़कंप मच गया है।
पुलिस की वर्दी को दागदार करने वाले और गंभीर मुकदमों की जांच में फर्जीवाड़ा करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ इंदौर पुलिस ने नजीर पेश की है। खजराना थाने में 31 अगस्त 2020 से 2 अगस्त 2023 तक पदस्थ रहे तत्कालीन टीआई दिनेश वर्मा पर यह गाज गिरी है। विभागीय जांच में सामने आया कि दिनेश वर्मा ने अपनी 3 साल की पदस्थापना के दौरान विवेचना के नाम पर कानून और नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाईं। जांच अधिकारियों के होश तब उड़ गए जब दस्तावेजों की पड़ताल में पता चला कि टीआई दिनेश वर्मा ने अपने कार्यकाल में 742 आपराधिक प्रकरणों में इरशाद पिता अब्दुल हकीम को और 504 प्रकरणों में 'नवीन पिता रामचंद्र चौहान को ही सरकारी गवाह बना दिया।
हैरानी की बात यह है कि जिन मामलों में फर्जी तरीके से एक ही तरह के गवाह खड़े किए गए, उनमें हत्या, हत्या के प्रयास, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट, धोखाधड़ी, कूटरचना, आबकारी एक्ट और एनडीपीएस एक्ट जैसे बेहद गंभीर और संगीन अपराध शामिल थे।इस गंभीर लीपापोती से कोर्ट में कई संगीन मामलों के कमजोर होने का खतरा पैदा हो गया था। पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के समक्ष जब विभागीय जांच रिपोर्ट पेश हुई और दोष सिद्ध पाए गए, तो उन्होंने तुरंत आदेश जारी कर आरोपी टीआई दिनेश वर्मा को डिमोट कर वापस सब इंस्पेक्टर बना दिया।

