गेहूं खरीदी के बीच जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में बड़ा फेरबदल, 8 शाखा प्रबंधकों के तबादले, भोपाल से आया आदेश
Sunday, Apr 26, 2026-04:35 PM (IST)
रायसेन (शिवलाल यादव) : गेहूं खरीदी के संवेदनशील दौर के बीच जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित रायसेन में अचानक किए गए बड़े प्रशासनिक फेरबदल ने बैंक की कार्यप्रणाली और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैंक के प्रधान कार्यालय से जारी आदेश में एक साथ 8 शाखा प्रबंधकों का स्थानांतरण कर दिया गया है। इसके साथ ही 3 कर्मचारियों की वेतन वृद्धि रोकने और एक शाखा प्रबंधक को निलंबित करने की कार्रवाई भी सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम को बैंक के भीतर बढ़ते प्रशासनिक संकट और संभावित वित्तीय अनियमितताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधान कार्यालय में पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 24 अप्रैल की रात जारी आदेश के बाद बैंक की विभिन्न शाखाओं में व्यापक स्तर पर बदलाव किए गए। यह आदेश ऐसे समय में आया है, जब जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का काम जोरों पर चल रहा है।खरीदी प्रक्रिया के बीच इस तरह के तबादलों से किसानों की भुगतान व्यवस्था और शाखाओं के संचालन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक बैंक में पहले से ही चपरासी द्वारा करीब 55 लाख रुपए के गबन का मामला चर्चा में है। इसी पृष्ठभूमि में अचानक किए गए तबादलों को लेकर बैंक कर्मचारियों और सहकारी क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सवाल यह उठ रहा है कि खरीदी शुरू होने के करीब दो सप्ताह बाद ही इतनी बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की जरूरत क्यों पड़ी।

आदेश के तहत मुख्य कोआपरेटिव शाखा रायसेन से जुड़े कई अधिकारियों को दूसरी शाखाओं में भेजा गया है। कुछ शाखाओं में नए प्रभार सौंपे गए हैं, तो कुछ जगहों पर अनुभवहीन अधिकारियों को जिम्मेदारी देने की बात भी सामने आई है। बैंक सूत्रों का कहना है कि कई शाखाओं में गेहूं खरीदी का काम अभी अपने चरम पर है।ऐसे में शाखा प्रबंधकों का अचानक बदलाव भुगतान, तुलाई और रिकॉर्ड संधारण की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
इसी बीच तीन बैंक कर्मचारियों की वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोकने के आदेश भी जारी किए गए हैं। इनमें लेखा शाखा और स्थापना शाखा से जुड़े कर्मचारियों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। यह कार्रवाई विभागीय अनियमितताओं और प्रशासनिक आपत्तियों के आधार पर की गई है। कर्मचारियों के खिलाफ इस तरह की सख्त कार्रवाई ने बैंक के अंदरूनी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
सबसे गंभीर बात यह है कि एक शाखा प्रबंधक को निलंबित भी किया गया है। हालांकि निलंबन के पीछे स्पष्ट कारणों को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे हालिया वित्तीय गड़बड़ियों और निरीक्षण में सामने आई कमियों से जोड़कर देखा जा रहा है।सहकारी क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि खरीदी सीजन के दौरान शाखाओं में लगातार फेरबदल होते रहे, तो इसका सीधा असर किसानों के भुगतान पर पड़ सकता है। पहले ही स्लॉट बुकिंग, तुलाई और भुगतान में देरी को लेकर किसान परेशान हैं। ऐसे में बैंक स्तर पर अस्थिरता स्थिति को और जटिल बना सकती है।
वहीं, पूरे मामले में यह चर्चा भी जोरों पर है कि इतना बड़ा फैसला क्या जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग की सहमति से लिया गया या फिर यह केवल बैंक प्रबंधन स्तर का निर्णय है। बैंक की कार्यप्रणाली को पटरी पर लाने के लिए अब जिला प्रशासन के हस्तक्षेप की मांग भी उठने लगी है।
कुल मिलाकर, गेहूं खरीदी के बीच जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में हुआ यह व्यापक फेरबदल बैंक के “बैंकप्ट जैसी स्थिति” की ओर बढ़ने के संकेत दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह प्रशासनिक बदलाव व्यवस्था सुधारने में कितना कारगर साबित होता है या फिर किसानों और बैंकिंग व्यवस्था के लिए नई मुश्किलें खड़ी करता है।
इनका कहना है
यह तबादले हेड ऑफिस भोपाल से आए आदेश के तहत किए गए हैं। इसमें मेरा कोई कसूर नहीं है। अजय कुमार सीईओ कोआपरेटिव बैंक रायसेन

