जेल में उम्रकैद काट रहे हिंदू कैदी को दिल दे बैठीं मुस्लिम डिप्टी जेलर, रिहाई के बाद रचाई शादी
Thursday, May 07, 2026-02:06 PM (IST)
सतना। मध्य प्रदेश के सतना से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने समाज, धर्म और परंपराओं की तमाम सीमाओं को चुनौती दे दी। केंद्रीय जेल सतना में पदस्थ सहायक जेलर फिरोजा खातून ने उसी शख्स को अपना जीवनसाथी चुना, जो कभी उम्रकैद की सजा काट रहा कैदी था। यह रिश्ता अब सिर्फ प्रेम कहानी नहीं, बल्कि इंसानियत, साहस और सामाजिक बंधनों से ऊपर उठकर लिए गए फैसले की मिसाल बन गया है। कहानी की शुरुआत जेल की उन दीवारों के भीतर हुई, जहां फिरोजा खातून वारंट इंचार्ज के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रही थीं। वहीं हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे धर्मेंद्र सिंह वारंट से जुड़े काम देखते थे। ड्यूटी के दौरान हुई बातचीत धीरे-धीरे दोस्ती में बदली और फिर यही दोस्ती गहरे प्रेम में तब्दील हो गई।
धर्मेंद्र सिंह, छतरपुर जिले के चंदला क्षेत्र के रहने वाले हैं। वर्ष 2007 में नगर परिषद अध्यक्ष कृष्णादत्त दीक्षित हत्याकांड में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। करीब चार वर्ष पहले सजा पूरी होने के बाद वह जेल से रिहा हो गए, लेकिन जेल में शुरू हुई मोहब्बत रिहाई के बाद भी खत्म नहीं हुई। दोनों लगातार संपर्क में रहे और अंततः जीवनभर साथ रहने का फैसला कर लिया।
हालांकि यह रास्ता आसान नहीं था। एक तरफ मुस्लिम परिवार की बेटी फिरोजा खातून, दूसरी तरफ हिंदू युवक धर्मेंद्र सिंह। धर्म और समाज की दीवारें दोनों के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी थीं। बताया जा रहा है कि फिरोजा के परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया, लेकिन उन्होंने अपने फैसले से पीछे हटने से इनकार कर दिया।
5 मई को छतरपुर जिले के लवकुशनगर में दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से विवाह रचाया। वैदिक मंत्रोच्चार, सात फेरे और पारंपरिक रस्मों के बीच यह शादी पूरी हुई। शादी की सबसे चर्चित बात यह रही कि फिरोजा खातून के परिवार से कोई सदस्य समारोह में शामिल नहीं हुआ। ऐसे में कन्यादान की रस्म विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा और उनकी पत्नी ने निभाई। समारोह में बजरंग दल से जुड़े कई कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। शादी के बाद सामने आई तस्वीरों में दुल्हन बनीं फिरोजा खातून बेहद खुश नजर आ रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों तक इस अनोखी शादी की चर्चा हो रही है। कोई इसे “मोहब्बत की जीत” बता रहा है तो कोई “सामाजिक साहस” की मिसाल।
जेल प्रशासन से जुड़े लोगों के बीच भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग कह रहे हैं कि कानून और अनुशासन की जिम्मेदारी निभाने वाली अधिकारी ने अपने निजी जीवन में भी उतनी ही ईमानदारी और साहस दिखाया है। इस कहानी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि प्रेम का रिश्ता धर्म, जाति और अतीत की सीमाओं से कहीं बड़ा होता है।

