सरकारी स्कूल में गणतंत्र दिवस को बना दिया मजाक! मंच से टीचर बोले- 26 जनवरी को बूंदी खाने आते हैं

Thursday, Jan 29, 2026-01:44 PM (IST)

धमधा (हेमंत पाल) : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय राजपुर में 26 जनवरी जैसे पवित्र राष्ट्रीय पर्व पर राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय नारे और बच्चों की देशभक्ति भावना तीनों के साथ गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। इस पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि झंडा फहराने के समय तिरंगा सही तरीके से फहर नहीं पाया, इसके बावजूद पूरी गंभीरता और सम्मान के साथ प्रक्रिया पूरी करने के बजाय तिरंगे को उतारकर दोबारा अलग से फहराया गया। जानकारों का कहना है कि यह सीधा-सीधा राष्ट्रीय ध्वज संहिता का उल्लंघन है, जिसे किसी भी सूरत में सामान्य गलती नहीं माना जा सकता। मामला यहीं खत्म नहीं होता। आरोप है कि विद्यालय के प्रधान पाठक गोपी राम साहू ने बच्चों से बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की। वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उन्होंने बच्चों से कहा- आप लोग तो 26 जनवरी को सिर्फ बूंदी खाने के लिए स्कूल आते हो।

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इस बयान ने अभिभावकों, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। लोगों का कहना है कि जहां राष्ट्रीय पर्व बच्चों में देशभक्ति, अनुशासन और सम्मान सिखाने का अवसर होता है, वहीं स्कूल के जिम्मेदार शिक्षक ही बच्चों का मज़ाक उड़ाते नजर आ रहे हैं। जब इस पूरे मामले में प्रधान पाठक गोपी राम साहू से सवाल किया गया, तो उनका जवाब और भी हैरान करने वाला रहा। उन्होंने कहा- जब हमने वंदे मातरम कहा, तो बच्चे बूंदी दे, बंदे दे कहने लगे।

यह बयान सीधे-सीधे यह साबित करता है कि बच्चों को न तो राष्ट्रीय नारे का महत्व सिखाया गया, न ही वंदे मातरम के सम्मान और भाव को समझाया गया। सवाल यह उठता है कि यदि स्कूल ही बच्चों को सही संस्कार नहीं देगा, तो देशभक्ति की नींव कैसे मजबूत होगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक शिक्षक की गलती नहीं, बल्कि पूरे स्कूल प्रबंधन की विफलता को उजागर करता है।

राष्ट्रीय पर्व का महत्व नहीं समझाया गया
ध्वजारोहण की मर्यादा का पालन नहीं हुआ
बच्चों को राष्ट्रीय नारे और सम्मान की शिक्षा नहीं दी गई

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सीधे तौर पर यह घटना राष्ट्रीय पर्व, राष्ट्रीय नारे और तिरंगे के अपमान के साथ-साथ बच्चों को गलत सीख देने का गंभीर मामला बनती है। घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि प्रधान पाठक के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच हो और दोषियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

सूत्रों के मुताबिक, वायरल वीडियो के आधार पर शिक्षा विभाग द्वारा जांच प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षक और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि जो संस्थान बच्चों को राष्ट्र निर्माण की शिक्षा देने के लिए बनाए गए हैं, वहीं यदि लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी हो, तो आने वाली पीढ़ी को क्या संदेश जाएगा?

अब बड़ा सवाल यही है

क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा? या फिर यह मामला भी जांच के नाम पर फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?


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Content Writer

meena

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