रेत विवाद हिंसा में बदला: दो पक्षों में चली गोलियां, कारोबारी दलवीर रावत घायल
Saturday, Jan 10, 2026-02:15 PM (IST)
डबरा (भरत रावत) : डबरा सिटी थाना क्षेत्र के ग्राम चांदपुर के रायपुर तिराह पर रेत उत्खनन व परिवहन को लेकर चल रहा विवाद शुक्रवार देर रात हिंसक हो गया। रेत परिवहन और ट्रैक्टर निकालने को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आए और आरोप है कि ठेकेदार से जुड़ी निजी फ्लाइंग टीम ने चेकिंग के नाम पर खुलेआम गोलियां चला दीं। इस फायरिंग में ग्राम चांदपुर निवासी रेत कारोबारी दलवीर रावत के पैर में गोली लग गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे पहले सिविल अस्पताल डबरा और फिर हालत नाजुक होने पर ग्वालियर रेफर किया गया। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि आखिर इन लोगों को गोली चलाने का अधिकार किसने दिया? यदि ठेकेदार ने वसूली का जिम्मा दिया है, तो क्या कानून अपने हाथ में लेने और गोली मारने की भी छूट दे दी गई है? यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेत परिवहन को लेकर ट्रैक्टर निकालने के विवाद में ठेकेदार की निजी फ्लाइंग टीम ने बिना मायनिंग विभाग या पुलिस की मौजूदगी के चेकिंग शुरू की। यदि इनके पास अवैध उत्खनन या परिवहन की कोई सूचना थी, तो उन्हें सीधे पुलिस या खनिज विभाग को सूचना देना चाहिए थी, ताकि नियमानुसार प्रकरण दर्ज होता और जुर्माना लगाया जाता। लेकिन आरोप है कि निजी फ्लाइंग ने खुद ही जज बनते हुए गोलियों की बौछार कर दी। एक गोली दलवीर रावत के पैर में लगी और वह मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या अब रेत माफिया और निजी फ्लाइंग कानून से ऊपर हो गए हैं, जो पैसा न देने पर गोली मारने जैसी धमकियां और कार्रवाई कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिले में अधिकतर रेत खदानें पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर चल रही हैं, जहां आपराधिक प्रवृत्ति के लोग मनमर्जी से वसूली कर रहे हैं। बिना रॉयल्टी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खुलेआम सड़कों पर दौड़ रही हैं, लेकिन पुलिस, राजस्व और खनिज विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
वहीं इस पूरे मामले पर डबरा सिटी थाना प्रभारी संजय शर्मा का कहना है कि घटना की गंभीरता से जांच की जा रही है। फरियादी की शिकायत मिलते ही मामला दर्ज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि घायल को इलाज के दौरान एनेस्थीसिया दिया गया था, जिस कारण वह बयान देने की स्थिति में नहीं था। होश में आने के बाद उसके बयान दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की।

