Punjab Kesari MP ads

इंदौर में नियुक्तियों पर घमासान! महिला मोर्चा अध्यक्ष पद की रेस में ये चेहरे

Saturday, May 16, 2026-07:07 PM (IST)

इंदौर : मध्य प्रदेश के इंदौर नगर भाजपा में मोर्चा और प्रकोष्ठों की नियुक्तियों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजयुमो के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा महिला मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर हो रही है, जहां युवा और वरिष्ठ नेत्रियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। संगठन स्तर पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि सभी जिला अध्यक्ष जल्द से जल्द पैनल बनाकर प्रदेश नेतृत्व को भेजें, ताकि नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी की जा सके। इसी के चलते नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा लगातार कोर कमेटी सदस्यों से नामों पर रायशुमारी कर रहे हैं।

इस बार भाजपा नेताओं में महिला मोर्चा में नियुक्तियों को लेकर खींचतान देखने को मिली रही है। क्योंकि यहां एक ओर महिला मोर्चा में दावेदारों की लंबी सूची सामने आई है, वहीं बड़े नेता किसी एक नाम पर खुलकर समर्थन देने से बच रहे हैं। नेताओं का मानना है कि किसी एक चेहरे को आगे बढ़ाने पर बाकी दावेदारों की नाराजगी झेलना पड़ सकती है। यही वजह है कि कई वरिष्ठ नेता “जिसे बनाना है बना दो” की रणनीति अपनाए हुए हैं।

दरअसल, इंदौर नगर महिला मोर्चा में नियुक्तियों को लेकर दो धड़ों में बंट गया है। एक ओर युवा नेत्रियां हैं, जो संगठन में नई पीढ़ी को मौका देने की पैरवी कर रही हैं। उनका तर्क है कि लंबे समय से वही चेहरे पदों पर बने हुए हैं, जबकि अब युवा नेतृत्व को आगे लाने की जरूरत है ताकि संगठन में नई ऊर्जा और नई टीम तैयार हो सके। युवा नेत्रियां यह भी कह रही हैं कि वे जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं और सोशल मीडिया से लेकर बूथ स्तर तक बेहतर काम कर सकती हैं।

दूसरी ओर वरिष्ठ नेत्रियों का मानना है कि महिला मोर्चा भाजपा का गंभीर और संवेदनशील संगठनात्मक मंच है, जिसे अनुभव के साथ ही संभाला जा सकता है। उनका कहना है कि संगठन चलाने, कार्यक्रमों के समन्वय और राजनीतिक संतुलन बनाने का अनुभव वरिष्ठ नेताओं के पास ही है, इसलिए कमान अनुभवी हाथों में ही रहनी चाहिए। इसी खींचतान के कारण महिला मोर्चा की पैनल सूची अब तक फाइनल नहीं हो पाई है।

दिलचस्प बात यह भी है कि इंदौर की आठ बार सांसद रहीं पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इस बार खुद को पूरी प्रक्रिया से लगभग अलग कर लिया है। पिछले तीन दशकों से महिला मोर्चा अध्यक्ष के चयन में उनकी अहम भूमिका रहती थी और उनके सुझाव को अंतिम माना जाता था। बताया जा रहा है कि उन्होंने प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष को कुछ नाम सुझाए थे, लेकिन उन पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने हस्तक्षेप करना बंद कर दिया।

वहीं इंदौर सांसद शंकर लालवानी अपनी समर्थक और पार्षद संध्या यादव को महिला मोर्चा की कमान दिलाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। उन्होंने यादव का नाम प्रदेश महिला मोर्चा के लिए भी आगे बढ़ाया था। अब देखना यह होगा कि संगठन युवा चेहरों पर दांव लगाता है या फिर अनुभव को प्राथमिकता देकर वरिष्ठ नेतृत्व पर भरोसा जताता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

meena

Related News