किन्नर सपना गुरु ने राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु, बोली-मानसिक प्रताडंना से तंग,न्याय की आस नहीं,इंदौर में चल रहा किन्नर जिहाद
Thursday, Feb 05, 2026-04:36 PM (IST)
इंदौर (सचिन बहरानी): इंदौर में रहने वाली किन्नर सपना ने इच्छा मृत्यु की मांग करते हुए इंदौर पुलिस कमिश्नर सहित देश के राष्ट्रपति को पत्र भेजा है। इस पत्र के सामने आने के बाद शहर में सनसनी फैल गई है। किन्नर सपना का कहना है कि वह लगातार कानूनी मामलों, सामाजिक उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना से परेशान हो चुकी हैं, जिसके चलते उन्होंने यह बेहद कठोर कदम उठाने की मांग की है।

बताया जा रहा है कि बीते दिनों इंदौर के ही एक अन्य किन्नर गिरोह के कुछ सदस्यों द्वारा सपना के खिलाफ एक प्रकरण दर्ज करवाया गया था। इस मामले में जब सपना जमानत पर बाहर आईं, तो उनके खिलाफ अन्य किन्नरों की शिकायत पर पुलिस ने एक और मामला दर्ज कर लिया। लगातार दर्ज हो रहे मामलों और बढ़ते दबाव के कारण सपना मानसिक रूप से टूट चुकी हैं।
सपना मध्य प्रदेश की पहली नागा संन्यासी,राजपूत परिवार से संबंध-वकील
वहीं एडवोकेट सचिन सोनकर ने बताया है कि जिसे आप सपना हाजी कह रहे हैं वो सपना हाजी नहीं है, वो किन्नर अखाड़े की आचार्य महांमडलेश्वर और जूना अखाड़े की है। सपना मध्य प्रदेश की पहली नागा सन्यासी है और वो राजपूत परिवार से संबंधित हैं..वो कोई हाजी नहीं हैं उनका नाम सपना गुरू है। एडवोकेट सचिन ने आरोप लगाया कि हिंदू किन्नरों का धर्मांतरण कराया जा रहा है, पायल हाजी, सीमा हाजी और मुस्लिम किन्नर मालेगांव से यहां आए हैं,वो हिस्ट्रीशीटर किन्नर हैं। यहां पर किन्नर जिहाद चालाया जा रहा है मारपीट की जा रही है और HIV एडस के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। इसी के खिलाफ सपना गुरु ने मोर्चा खोला है
बार-बार प्रकरण दर्ज किए जाने से जीवन पूरी तरह प्रभावित
उनका आरोप है कि बार-बार प्रकरण दर्ज किए जाने से उनका सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है और उन्हें कहीं से भी न्याय की उम्मीद नजर नहीं आ रही।किन्नर सपना के एडवोकेट सचिन सोनकर ने बताया कि सपना की मानसिक स्थिति बेहद चिंताजनक है।इसी को देखते हुए उन्होंने इंदौर पुलिस कमिश्नर के साथ-साथ देश के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है।
पत्र में सपना ने उल्लेख किया है कि वह लगातार उत्पीड़न और अपमान का सामना कर रही हैं और उनके पास इस स्थिति से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है। एडवोकेट सचिन सोनकर का कहना है कि यह पत्र किसी प्रकार का दबाव बनाने के लिए नहीं, बल्कि सिस्टम का ध्यान आकर्षित करने के लिए लिखा गया है। उनका कहना है कि किन्नर समाज पहले से ही सामाजिक भेदभाव का शिकार रहा है और जब आपसी विवादों में कानून का सहारा लिया जाता है,तो निष्पक्ष जांच और मानवीय दृष्टिकोण बेहद जरूरी हो जाता है।
इस पूरे मामले को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।हालांकि,यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि किन्नर समाज की सामाजिक स्थिति और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करता है।अब देखना होगा कि प्रशासन और शासन स्तर पर इस पत्र को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं और किन्नर सपना को किसी प्रकार की राहत मिल पाती है या नहीं।

