MP में किसान आंदोलन उग्र, ट्रैक्टर मार्च रोकने के लिए पुलिस ने चलाया वाटर कैनन
Monday, Jul 20, 2026-02:42 PM (IST)
इंदौर। पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में सोमवार को इंदौर जिले के बरलाई जागीर से भोपाल कूच की तैयारी कर रहे किसानों और प्रशासन के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई। चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर ट्रैक्टरों के साथ रवाना होने पहुंचे किसानों को पुलिस ने शिप्रा चौराहे पर रोक दिया। हालात बिगड़ते देख भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जिसके बाद किसान वापस बरलाई जागीर पहुंचे और वहीं धरने पर बैठ गए।
किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ और सिंचित कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, लेकिन बदले में उन्हें न्यायसंगत मुआवजा नहीं दिया जा रहा। उनका आरोप है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों की आपत्तियों और सुझावों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे। पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थिति पर लगातार नजर रखी गई ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखते हुए किसानों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
यह विवाद इंदौर-देवास वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना से जुड़ा है। इस आउटर हाईवे का उद्देश्य भारी वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश कराए बिना वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है। साथ ही वर्ष 2028 में उज्जैन सिंहस्थ के दौरान संभावित यातायात दबाव को कम करने की दिशा में भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इस परियोजना से इंदौर, सांवेर और देपालपुर क्षेत्र के करीब 39 गांव प्रभावित होंगे।
प्रदर्शन कर रहे किसानों की प्रमुख मांग भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के प्रावधानों के अनुरूप बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा है। उनका कहना है कि मालवा की बहु-फसली और सिंचित कृषि भूमि उनके परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है। इसके अलावा कुछ ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण और लैंड पूलिंग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए इसे किसानों के हितों के विरुद्ध बताया है।
फिलहाल प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच समाधान की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

