‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर बुजुर्ग से 23.50 लाख की ठगी, दिल्ली पुलिस बनकर की साइबर वारदात
Tuesday, Jan 06, 2026-03:35 PM (IST)
बैतूल (रामकिशोर पवार): थाना गंज क्षेत्र में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर एक बुजुर्ग से ₹23 लाख 50 हजार की बड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने स्वयं को दिल्ली पुलिस अधिकारी बताकर व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को डराया और रकम ट्रांसफर करा ली।
फरियादी बसंत कुमार मैदमवार (80 वर्ष), निवासी विनायक रेसिडेंसी, बैतूल, जो एसबीआई से हेड कैशियर पद से सेवानिवृत्त हैं, ने पुलिस को बताया कि 27 नवंबर 2025 को उनके मोबाइल पर ‘Delhi Police’ लिखी हुई व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई। कॉलर ने आरोप लगाया कि उनके आधार कार्ड से दिल्ली में सिम जारी हुआ है, जिसका उपयोग ब्लैकमेलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने और ‘डिजिटल अरेस्ट’ की बात कही गई। लगातार कॉल कर मानसिक दबाव बनाया गया और खातों की जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को मजबूर किया गया। डर के कारण 1 दिसंबर 2025 को फरियादी ने एसबीआई खाते से ₹13.50 लाख यस बैंक और ₹10 लाख फिनो बैंक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। अगले दिन बैंक में गोल्ड लोन लेने पहुंचने पर बैंक प्रबंधक ने इसे साइबर ठगी बताया, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ।
पीड़ित की शिकायत पर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर रिपोर्ट दर्ज की गई। थाना गंज पुलिस ने अपराध क्रमांक 04/26 अंतर्गत धारा 318(4), 308 बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेंद्र जैन ने नागरिकों को सतर्क करते हुए कहा कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी जांच एजेंसी फोन या व्हाट्सएप कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती। किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज से डरें नहीं और तुरंत 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि अनजान कॉल, वीडियो कॉल या लिंक से सतर्क रहें, ताकि साइबर ठगी से बचा जा सके।

