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इस शहर में जलती चिताओं के बीच मनती है दिवाली, श्मशानघाट में रंगोली बनाकर जमकर होती है आतिशबाजी

Tuesday, Oct 21, 2025-01:29 PM (IST)

रतलाम (समीर खान) : रतलाम में श्मशान में दिवाली मनाई गई। जलती चिताओं के बीच अपने पूर्वजों की याद में यहां दिवाली मनाने सैकड़ों लोग जुटे हैं। मुक्तिधाम में दीपावली का त्योहार मनाने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी पहुंचते हैं। यहां रंगोली से मुक्तिधाम को सजाया गया और हजारों दीपक जलाकर मुक्तिधाम को रोशन किया गया। यहां की मान्यता है कि अपने पूर्वजों को याद करने और दीपदान करने से हमारे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और शुभ आशीर्वाद देते हैं। लोगों का कहना है कि दीपावली के मौके पर खुद का घर और दुकान तो हम रोशन कर लेते हैं, लेकिन पूर्वजों का यह स्थान अंधेरे में रह जाता है। इसके लिए करीब 20 सालों से श्मशान में दिवाली मनाने किया परंपरा लगातार चली आ रही है।

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दरअसल, रतलाम की प्रेरणा संस्था से जुड़े गोपाल सोनी बताते हैं कि 2006 में उनकी संस्था के 5 लोगों ने मिलकर श्मशान में दीपदान करने का कार्यक्रम आयोजित किया था,  जिसके बाद धीरे-धीरे लोग इस दीपदान कार्यक्रम से जुड़ते गए और अब बड़े स्तर पर मुक्तिधाम में दिवाली मनाने का आयोजन होता है। त्रिवेणी मुक्तिधाम में रूप एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है।

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एक तरफ जहां चिताएं जलती हुई नजर आती है। वहीं, शाम होते ही पूर्वजों को याद करने के लिए लोग यहां शमशान में दिवाली का उत्सव मनाते हैं, श्मशान में जहां घोर अंधेरा और शांति होती है, वहां दीपावली के मौके पर खुशियों और उत्साह के साथ महिलाएं और छोटे बच्चे भी दीपदानकर आतिशबाजी करते नजर आते हैं।

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बच्चे और महिलाएं बताते हैं कि उन्हें यहां आकर अपने पूर्वजों के लिए दीपदान करने और उन्हें याद करने में आनंद आता है। यहां पहुंचे श्रेणिक जैन बताते हैं कि "बच्चे और महिलाएं बिना डर के यहां पहुंच कर त्योहार मनाते हैं।" बहरहाल यह परंपरा ज्यादा पुरानी नहीं है करीब 20 से ही इस आयोजन को पूर्वजों की याद में किया जाता है, लेकिन अब धीरे-धीरे सैकड़ों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं और अपने पूर्वजों की याद में दीपदान करते हैं।


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meena

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