खराब किट और जिंदगी उथल पुथल, 14 साल की बच्ची को बताया प्रेग्नेंट, पुलिस और लोगों ने जीना किया दुश्वार, अब हुआ बड़ा एक्शन
Monday, Jun 08, 2026-07:05 PM (IST)
राजनांदगांव/रायपुर (पुष्पेंद्र सिंह) : छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां सोमनी क्षेत्र में 14 साल की बच्ची को गलत जांच में प्रेग्नेंट बता दिया। बताया जा रहा है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किशोरी की तीन बार प्रेग्नेंसी जांच की गई। तीनों बार रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद मानों परिजनों के होश उड़ गए हो। मामला बढ़ा तो विपक्ष की आपत्ति के बाद जब जिला अस्पताल में यही जांच कराई गई तो रिपोर्ट नेगेटिव आई। जांच में पता चला है कि फर्म विशेष से खरीदी गई प्रेग्नेंसी किट ही खराब है। गंभीर लापरवाही वाले मामले में राज्य सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए संबंधित चिकित्सा अधिकारी को निलंबित कर दिया है।
राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(a) के तहत, घुमका (जिला राजनांदगांव) के चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.के. टंडन को तत्काल प्रभाव से निलंबित करती है। सस्पेंशन की अवधि के दौरान, डॉ. एन.के. टंडन का मुख्यालय डिविज़नल जॉइंट डायरेक्टर, हेल्थ सर्विसेज़, दुर्ग डिविज़न (दुर्ग) के कार्यालय में तय किया गया है, और वे सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे।

ये है पूरा मामला
घटना 25 मई की रात की है। यहां एक 14 वर्षीय किशोरी को पेट दर्द की शिकायत के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इलाज के लिए लाया गया था। वहां जांच के बाद उसे गर्भवती बता दिया गया। इससे उसका पूरा परिवार सदमे में आ गया। अस्पताल में एमएलसी (MLC) रिपोर्ट बना दी गई, इस कारण इसमें पुलिस की भूमिका आ गई। इतना ही नहीं पुलिसवालों ने किशोरी को परिजनों समेत थाने बुला लिया। इस दौरान पुलिस ने बेहद अमानवीयता तरीके से परिजनों से पूछताछ की। इतना ही नहीं, गांव में झूठी बातें फैलाकर परिवार को अपमानित भी किया गया। साथ ही किशोरी को उसके ननिहाल से बर्थडे पार्टी से उठाकर वापस थाने लाया गया। परिजनों को मानसिक रुप से प्रताड़ित किया गया। मामला बढ़ा तो पीड़ित परिवार को कांग्रेस का साथ मिला। दवाब के बाद बच्ची की जिला अस्पताल से जांच कराई गई यहां रिपोर्ट नेगेटिव आई और पता चला कि घटिया क्वालिटी की किट बरतने की वजह से बच्ची की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जबकि सच्चाई ये है कि बच्ची प्रेग्नेंट नहीं थी। सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। इधर किशोरी और परिजनों को प्रताड़ित करने के आरोप में एसपी अंकिता शर्मा ने निरीक्षक अरुण कुमार नामदेव और महिला प्रधान आरक्षक जयश्री सिंह को पहले दिन लाइन अटैच किया। दोनों को रक्षित आरक्षी केंद्र यानी पुलिस लाइन में पदस्थ किया गया है। निलंबन आदेश में कहा गया है कि बिना अनुमति के दोनों मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। वहीं मामले में स्वास्थ्य विभाग की भी लापरवाही पाई गई जिसके बाद चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.के. टंडन को आज निलंबित कर दिया गया है।

