जितना प्यार एक पतिव्रता नारी अपने सुहाग से करती है उससे ज्यादा प्यार एक मर्द को अपने हथियारों से करना चाहिए- यति नरसिंहानंद
Tuesday, Mar 31, 2026-07:22 PM (IST)
गुना (मिसबाह नूर): डासना देवी मंदिर के महामंडलेश्वर और प्रखर हिंदुत्ववादी नेता यति नरसिंहानंद सरस्वती ने गुना प्रवास के दौरान बड़ी बड़ी बातें बोली हैं। उन्होंने कहा जिस तरह से भारत में जेहादियों की जनसंख्या बढ रही है,वो काफी खतरनाक है । ये जेहादी आतंकवाद बरेली के कठमुल्लों और देवबंद दारुल उलूम से प्रेरित है। ये तालिबान के असली मालिक है। यही आने वाले समय मे विश्व गुरु बनेंगे।
उन्होंने कहा कि आप अगर हथियार नहीं खरीद रहे हैं तो आप मर्द नहीं है। हमारी बेटियों में हमारा कोई डर नहीं रह गया है। किसी भी हिंदू लड़की को किसी मुस्लमान व्यक्ति और मुसलमान महिला से दोस्ती नहीं करनी चाहिए।असली जेहादन तो मुस्लिम औरतें हैं। ये अपने पिता पति और बच्चों के साथ खड़ी होती हैं जब हमारे बेटियों के साथ रेप होते है। उन्होंने कहा कि भारत हमारी अंतिम शरणस्थली है और अगर ये देश इस्लाम के पंजे में गया तो सनातन धर्म जड़ से खत्म हो जाएगा।।
ये देश 1400 सौ साल से समर्पण के लिए बैठा है , सिर्फ कुछ लोग है जिन्होंने लड़ाई लड़ी है, हम अपने बाप दादाओं के आभारी होने चाहिए। इसके साथ ही कहा कि जितना नुकसान पार्टीबाजी औऱ सगठनबाजी ने पहुंचाया है इतना तो हमें जातिवाद ने भी नहीं पहुंचाया है।
विश्वगुरु बनने के सपने पर नरसिंहानंद ने प्रश्न उठाए। उनका कहना था कि भारत अगर विश्वगुरु बन भी गया, तो वह सनातन भारत नहीं बल्कि मुस्लिम भारत होगा। जनसंख्या असंतुलन के चलते हिंदू समुदाय धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने कुछ हिंदू गुरुओं पर भी हमला करते हुए कहा कि वे केवल अपने अनुयायियों को भ्रमित कर रहे हैं और व्यक्तिगत लाभ के लिए धर्म का उपयोग कर रहे हैं।
महंत ने भारत की ऐतिहासिक लड़ाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि देश अधिकांश समय समर्पण की मुद्रा में रहा है और वास्तविक संघर्ष करने वाले केवल मुठ्ठीभर लोग रहे हैं, जैसे महाराणा प्रताप, छत्रसाल, शिवाजी और गुरु गोविंद सिंह। उन्होंने अपने पूर्वजों का धन्यवाद किया, जिन्होंने कठिनाइयाँ सहकर और अधिक संतान पैदा कर हिंदू अस्तित्व बचाया। इसके अलावा, उन्होंने आतंकवाद के केंद्रों का जिक्र करते हुए कहा कि सिर्फ अरब या पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि भारत के दारुल उलूम देवबंद और बरेली जैसे धार्मिक केंद्र भी तालिबान के वैचारिक आधार हैं।

