दतिया में रिस्क नहीं लेगी BJP! हेमंत खंडेलवाल और डिप्टी CM संभालेंगे मोर्चा, नरोत्तम मिश्रा पर भी मंथन
Sunday, Jul 12, 2026-01:44 PM (IST)
दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव को भारतीय जनता पार्टी ने प्रतिष्ठा की लड़ाई बना लिया है। प्रत्याशी घोषित होने के बाद उभरे संगठनात्मक असंतोष और कार्यकर्ताओं की नाराजगी को देखते हुए अब पार्टी कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि प्रदेश नेतृत्व ने चुनावी कमान सीधे अपने हाथ में लेते हुए संगठन और सरकार के कई दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल स्वयं दतिया पहुंचकर चुनावी रणनीति की समीक्षा करेंगे और संगठन के सभी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देंगे। वहीं, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को भी चुनावी मोर्चे पर सक्रिय जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी का उद्देश्य संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर उपचुनाव में किसी भी तरह की ढिलाई से बचना है।
बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका पर भी विस्तार से मंथन होगा। पार्टी नेतृत्व इस बात पर विचार कर सकता है कि चुनाव प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी जिम्मेदारी किस प्रकार तय की जाए, ताकि कार्यकर्ताओं के बीच सकारात्मक संदेश जाए और चुनावी अभियान को मजबूती मिले।
सूत्रों का यह भी कहना है कि प्रत्याशी चयन के बाद जिस तरह कुछ स्थानीय पदाधिकारियों और जिला कार्यकारिणी के सदस्यों की नाराजगी सामने आई, उसे प्रदेश नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है। माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बैठक में अनुशासन का स्पष्ट संदेश देंगे और बगावती तेवर दिखाने वाले नेताओं व पदाधिकारियों से भी जवाब-तलब किया जा सकता है।
दरअसल, भाजपा ने दतिया उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाया है। इसके बाद पार्टी के एक वर्ग में असंतोष खुलकर सामने आया था। कई कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराया, जिससे संगठन को स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़े।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, प्रदेश नेतृत्व चुनाव प्रबंधन को और मजबूत बनाने के लिए दतिया के बाहर के अनुभवी नेताओं और संगठन पदाधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप सकता है। बूथ प्रबंधन, जनसंपर्क और चुनाव संचालन की अलग-अलग टीमें बनाई जा सकती हैं, ताकि पूरे चुनाव अभियान पर प्रदेश नेतृत्व की सीधी निगरानी बनी रहे।
कुल मिलाकर, भाजपा ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि दतिया उपचुनाव में वह किसी भी प्रकार का राजनीतिक जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है। संगठन की पूरी ताकत झोंककर पार्टी जीत सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि आने वाले दिनों में दिग्गज नेताओं की सक्रियता और चुनावी समीकरणों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

