कांग्रेस के ‘घर का भेदी’ का चल गया पता? जहां से लीक हुए थे मीनाक्षी नटराजन के दस्तावेज, जानिए अंदर की पूरी कहानी
Thursday, Jun 11, 2026-03:14 PM (IST)
भोपाल: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का मामला अब केवल एक चुनावी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और संगठनात्मक खींचतान को भी राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। भाजपा की ओर से किए गए दावों ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक रहस्यमय बना दिया है।सूत्रों के अनुसार, मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी को चुनौती देने के लिए जिन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, वे मध्य प्रदेश से नहीं बल्कि तेलंगाना से जुटाए गए थे। भाजपा का दावा है कि उसके पास केवल एक आधार नहीं था, बल्कि नामांकन को चुनौती देने के लिए ‘प्लान-बी’ तक तैयार था। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर कांग्रेस के भीतर ऐसा कौन है जिसने संवेदनशील जानकारियां बाहर पहुंचाईं?
भाजपा नेताओं के लगातार बयानों ने कांग्रेस के भीतर गुटबाजी की चर्चाओं को हवा दे दी है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस के ही कुछ प्रभावशाली चेहरे भाजपा तक महत्वपूर्ण सूचनाएं पहुंचा रहे हैं। वहीं, तेलंगाना की राजनीति को लेकर सामने आई चर्चाओं ने इस विवाद को नया आयाम दे दिया है। बताया जा रहा है कि मीनाक्षी नटराजन और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के बीच लंबे समय से राजनीतिक असहजता बनी हुई थी, जिसकी गूंज अब इस मामले में भी सुनाई दे रही है।
हालांकि कांग्रेस इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। पार्टी का कहना है कि भाजपा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर उठ रहे सवालों से ध्यान भटकाने के लिए ‘घर का भेदी’ जैसी कहानी गढ़ रही है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि यह पूरा विवाद राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति का हिस्सा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा के आरोपों में सच्चाई है या फिर यह केवल राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है? लेकिन इतना तय है कि मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद ने कांग्रेस के भीतर विश्वास और नेतृत्व को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्यसभा की एक सीट का चुनाव अब दो दलों की राजनीतिक लड़ाई से आगे बढ़कर कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों की पड़ताल का विषय बन चुका है।
राजनीति में विरोधियों से ज्यादा नुकसान कई बार अपने ही लोग पहुंचा देते हैं। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव का यह विवाद भी फिलहाल उसी कहावत को मजबूती देता दिखाई दे रहा है— घर का भेदी लंका ढाए। अब देखना होगा कि इस कथित ‘भेदी’ का सच कभी सामने आता है या यह रहस्य राजनीतिक गलियारों में ही दफन रह जाता है।

