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कांग्रेस से जीतीं, BJP के साथ दिखीं... क्या अब चली जाएगी विधायक जी की कुर्सी

Thursday, Jun 18, 2026-08:25 PM (IST)

जबलपुर। मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय बनी बीना विधायक निर्मला सप्रे दलबदल प्रकरण में अब फैसला आने की घड़ी नजदीक पहुंच गई है। जबलपुर हाई कोर्ट ने मामले की विस्तृत सुनवाई पूरी करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। इस बहुचर्चित मामले पर न केवल राजनीतिक दलों बल्कि प्रदेश की सियासी गलियारों की भी नजरें टिकी हुई हैं।यह मामला केवल एक विधायक की सदस्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में दल-बदल कानून की प्रभावशीलता और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क और साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे। लंबी बहस के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखने का आदेश दिया।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने विधानसभा स्तर पर दो वर्षों से लंबित प्रक्रिया को लेकर नाराजगी जताई थी। अदालत ने सवाल उठाया था कि इतने महत्वपूर्ण मामले में अब तक अंतिम निर्णय क्यों नहीं लिया गया। उस समय राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रक्रिया जारी है।

इस पूरे विवाद का सबसे दिलचस्प पहलू वह बयान रहा, जिसमें निर्मला सप्रे ने अदालत के समक्ष खुद को अब भी कांग्रेस का सदस्य बताया। हाई कोर्ट ने इस बयान को अपने रिकॉर्ड में दर्ज भी किया है। दूसरी ओर कांग्रेस का आरोप है कि लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा के पक्ष में सक्रिय प्रचार किया और सार्वजनिक मंचों पर भाजपा नेताओं के साथ नजर आईं।

दरअसल, 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर बीना सीट से जीत हासिल करने वाली निर्मला सप्रे के भाजपा से निकट संबंधों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष से उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग करते हुए कई दस्तावेज और कथित प्रमाण भी प्रस्तुत किए थे। स्पीकर स्तर पर निर्णय नहीं होने के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा।

अब पूरा प्रदेश उस फैसले का इंतजार कर रहा है, जो न केवल निर्मला सप्रे के राजनीतिक भविष्य का निर्धारण करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि दलबदल के आरोपों के बीच संवैधानिक व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है। यदि अदालत या विधानसभा स्तर पर सदस्यता समाप्त करने का निर्णय होता है तो बीना विधानसभा क्षेत्र में नए राजनीतिक समीकरण बनने तय माने जा रहे हैं। वहीं यदि सदस्यता बरकरार रहती है तो यह कांग्रेस के आरोपों और भाजपा-कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक संघर्ष को नई दिशा दे सकती है। फिलहाल फैसला सुरक्षित है, लेकिन इस फैसले का असर बीना से लेकर भोपाल तक की राजनीति में दूरगामी होने वाला माना जा रहा है।


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Content Editor

Himansh sharma

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