MP में 32 अधिकारियों के तबादलों के बीच चर्चा में आया इस IAS कपल का ट्रांसफर ऑर्डर, क्या ये गलती पड़ गई भारी?
Friday, Aug 21, 2026-08:39 PM (IST)
खंडवा (मुश्ताक मंसूरी) : मध्य प्रदेश में आज 32 IAS अधिकारियों के तबादले हुए हैं, इनमें खंडवा जिले में भी दो अधिकारी इधर से उधर किए हैं। जिला पंचायत सीईओ एवं प्रभारी कलेक्टर रहे नागार्जुन बी. गौड़ा का तबादला सतना नगर निगम आयुक्त के पद पर किया गया है। जबकि उनकी पत्नी अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख को रीवा स्थानांतरित किया गया है। दोनों अधिकारियों के तबादले के बाद प्रशासनिक गलियारों के साथ राजनीतिक हलकों में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
क्या ये गलती पड़ गई भारी?
तबादले की चर्चा को पिछले सप्ताह गांधवा में आयोजित मुख्यमंत्री जनसमस्या शिविर से भी जोड़कर देखा जा रहा है। निर्धारित कार्यक्रम सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक था, लेकिन आरोप है कि शिविर निर्धारित समय से पहले ही समाप्त कर दिया गया। खास बात यह रही कि क्षेत्रीय विधायक छाया मोरे और सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल कार्यक्रम स्थल से करीब 8 किलोमीटर दूर कोहदड़ में मौजूद थे, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही जिला स्तरीय अमला वहां से रवाना हो गया।
विधायक-सांसद की नाराजगी की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, इस घटनाक्रम को लेकर विधायक और सांसद ने अपनी नाराजगी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचाई थी। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। उस समय कलेक्टर ऋषभ गुप्ता अवकाश पर थे और जिले का प्रभार जिला पंचायत सीईओ नागार्जुन बी. गौड़ा के पास था।
इसी दौरान प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी थी कि गौड़ा को खंडवा कलेक्टर की जिम्मेदारी दी जा सकती है। लेकिन अब उनके तबादले के बाद इन चर्चाओं पर विराम लग गया है। कलेक्टर बनने की अटकलों के बीच गौड़ा को सतना नगर निगम आयुक्त की जिम्मेदारी मिली है।
आदेश में गांधवा प्रकरण का जिक्र नहीं
हालांकि तबादला आदेश में गांधवा के जनसमस्या शिविर या किसी विवाद का कोई उल्लेख नहीं है, लेकिन घटनाक्रम के तुरंत बाद हुए तबादलों की टाइमिंग ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं।
वहीं, मंत्री विजय शाह की मौजूदगी में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ प्रशासनिक समन्वय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि तबादलों का सीधा संबंध गांधवा प्रकरण से है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह महज सामान्य प्रशासनिक तबादला है या गांधवा शिविर में सामने आई समन्वय की चूक ने भी इसकी टाइमिंग को प्रभावित किया है? फिलहाल आधिकारिक तौर पर दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध नहीं बताया गया है।
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